SIR को लेकर देशभर में जारी सियासी बहस के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 13 करोड़ वोट कटने के दावे को भ्रामक और असत्य बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में मृत, अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले नामों को प्रक्रिया के तहत चिन्हित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट सूची में किसी नाम का चिन्हित होना यह नहीं दर्शाता कि उसका नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
13 करोड़ वोट कटने के दावे पर CM का जवाब
लोकतंत्र की मजबूती के लिए विश्वसनीय मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों का व्यापक सत्यापन एवं शुद्धीकरण कर प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार को सुरक्षित करना तथा दोहरे, अपात्र एवं अन्य अनियमित प्रविष्टियों की पहचान करना है। लगभग 1.01 करोड़ डुप्लीकेट नाम चिन्हित किए गए हैं। ऐसे में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक एवं विश्वसनीय बनाने की इस प्रक्रिया में सभी का सहयोग आवश्यक है। प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार सुनिश्चित हो, हर वोट की शुचिता सुरक्षित रहे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी व निष्पक्ष बने।
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) October 6, 2026
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि SIR में 13 करोड़ वोट कटने का दावा पूरी तरह भ्रामक और असत्य है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए SIR को लेकर जनता के बीच भ्रम और अफवाह फैलाने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक ड्राफ्ट सूची में मृत मतदाताओं, अनुपस्थित मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं और दोहरी प्रविष्टियों को चिन्हित किया गया है।
ड्राफ्ट में नाम चिन्हित होने का क्या मतलब?
SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि ड्राफ्ट सूची में नाम चिन्हित होने का क्या मतलब है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी प्रविष्टि का ड्राफ्ट सूची में चिन्हित होना अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बराबर नहीं है।
पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रहें और मतदाता सूची को लेकर प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। इसके साथ फर्जी मतदान पर अंकुश लगाना और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना भी प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने मतदाताओं से राजनीतिक दावों और अफवाहों से सावधान रहने की अपील की। साथ ही मतदाता सूची से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सूचना तंत्र पर भरोसा करने को कहा।
20 राज्यों में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने का अभियान
SIR के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का विपक्षी दलों की ओर से दावा किया गया है। इसी बीच चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के बाद छूटे पात्र नागरिकों के नाम दोबारा शामिल करने के लिए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
यह लिखित निर्देश 29 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया था। इसके बाद 1 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस निर्देश को दोबारा स्पष्ट किया गया।
दावे-आपत्तियों से नाम सुरक्षित रखने का मौका
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद पात्र मतदाताओं के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया अहम हो जाती है। मुख्यमंत्री के बयान का जोर भी इसी प्रक्रिया पर है।
यानी ड्राफ्ट सूची में किसी नाम के चिन्हित होने और अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बीच अंतर है। पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा रखने का अवसर दिया गया है।
SIR पर सियासी घमासान जारी
SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। ड्राफ्ट सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के दावे के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोगों से राजनीतिक दावों के बजाय तथ्यों के आधार पर जानकारी लेने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और SIR से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सूचना तंत्र पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।