पंजाब में किसान संगठनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। आंदोलन की तैयारियों को लेकर गुरदासपुर जिले में किसान नेताओं ने गांव-गांव जाकर किसानों और ग्रामीणों से संपर्क शुरू कर दिया है। कई गांवों में किसान संगठनों के झंडे लगाए जा रहे हैं और आगामी रणनीति को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं।
किसान नेता निर्मल सिंह अदी के मुताबिक, 31 अगस्त को पूरे पंजाब में जिला उपायुक्त यानी DC कार्यालयों के बाहर एक दिवसीय रोष प्रदर्शन किया जाएगा। गुरदासपुर में भी बड़ी संख्या में किसानों के जुटने का दावा किया गया है। किसान संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और अलग-अलग क्षेत्रों से किसानों को इसमें शामिल होने के लिए लामबंद किया जा रहा है।
शंभू-खनौरी आंदोलन में सरकार की भूमिका पर सवाल
किसान नेताओं ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चले किसान आंदोलन के दौरान पंजाब सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार ने आंदोलनकारी नेताओं को बातचीत के लिए बुलाने के बाद आंदोलन को कमजोर करने और खत्म कराने के लिए कथित तौर पर भाजपा के साथ मिलकर काम किया।
किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन के दौरान किसानों, मजदूरों और महिलाओं की गिरफ्तारियां की गईं। उनका दावा है कि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया। किसान संगठनों ने सरकारी तंत्र पर प्रदर्शनकारियों का करीब 3.77 करोड़ रुपये का सामान कथित तौर पर लूटने का भी आरोप लगाया है।
हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
MSP की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी प्रमुख मांग
किसान संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों को एक बार फिर दोहराया है। इनमें फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी और किसानों की पूर्ण कर्जमाफी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि लंबे समय से इन मांगों को लेकर सरकारों के सामने आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप ठोस समाधान नहीं हुआ है। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।
14 सितंबर से मंत्रियों के घरों का घेराव
किसान संगठनों ने आंदोलन की अगली रणनीति का भी ऐलान कर दिया है। किसान नेताओं के अनुसार, यदि 31 अगस्त को होने वाले प्रदर्शन के बाद पंजाब सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो 14 सितंबर से मंत्रियों के आवासों का पांच दिवसीय घेराव किया जाएगा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि इसके बाद भी सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। संगठनों ने राज्यभर में रेल रोको आंदोलन जैसे कड़े कदम उठाने की चेतावनी भी दी है।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ जुटेंगे किसान
आंदोलन को सफल बनाने के लिए किसान संगठन जोन स्तर पर बैठकें कर रहे हैं। किसान नेता रणबीर सिंह डुगरी और सतनाम सिंह खजांची ने बताया कि 31 अगस्त को गुरदासपुर DC कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में किसान एकत्र होंगे।
वहीं, 14 सितंबर से प्रस्तावित मंत्रियों के आवासों के घेराव के लिए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। गांवों में बैठकों और जनसंपर्क के जरिए किसानों को आंदोलन की रणनीति की जानकारी दी जा रही है।
बैठकों में सुखदेव सिंह अल्लार पिंडी, करनैल सिंह मल्ही, खजान सिंह अली नंगल, लखविंदर सिंह नंगल डाला, करसाज सिंह, निशान सिंह नूरपुर, शिव कुमार हरदोछन्नी, बीबी मनजिंदर कौर और जसकीरत कौर समेत कई किसान नेता मौजूद रहे।