भोपाल में विकास परियोजनाओं के नाम पर पेड़ों की कटाई और उसके बदले किए जाने वाले क्षतिपूर्ति पौधारोपण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने सख्त रुख अपनाया है। NGT की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अधिकरण ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पिछले पांच वर्षों में लगाए गए जो पौधे नष्ट हो चुके हैं, उनकी जगह नए पौधे लगाए जाएं। इसके साथ ही नए पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा सुनिश्चित कर 100 प्रतिशत सर्वाइवल का लक्ष्य हासिल किया जाए। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे।
पौधों की खराब सर्वाइवल रेट पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान पेश की गई रिपोर्ट में पौधों के जीवित रहने की दर बेहद कम पाई गई। भोपाल नगर निगम और डीएफओ पर्यावरण वानिकी मंडल की ओर से किए गए पौधारोपण में बड़ी संख्या में पौधों के नष्ट होने की जानकारी सामने आई। NGT ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए किया गया पौधारोपण यदि देखरेख के अभाव में नष्ट हो जाए तो इसका उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। अधिकरण ने माना कि ऐसी स्थिति में पर्यावरण को वास्तविक लाभ मिलने के बजाय नुकसान हो रहा है। NGT ने संबंधित विभागों को केवल कागजी आंकड़ों के बजाय जमीन पर पौधों की वास्तविक स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
फंड मिलने के बावजूद नहीं हुआ पौधारोपण
रिपोर्ट की जांच के दौरान NGT के सामने यह सवाल भी आया कि वर्ष 2025 में पौधारोपण के लिए फंड उपलब्ध होने के बावजूद वर्ष 2026 के मानसून सत्र में पौधारोपण का काम क्यों शुरू नहीं किया गया। डीएफओ पर्यावरण वानिकी मंडल की रिपोर्ट में इस संबंध में कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। अधिकरण ने इस स्थिति पर भी नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। NGT ने निर्देश दिया कि क्षतिपूर्ति पौधारोपण की प्रक्रिया सिर्फ राशि जारी करने या कागजों में पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पौधों के बड़े होने तक उनकी निगरानी और देखभाल की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की होगी।
पौधों की ऊंचाई और मोटाई का रिकॉर्ड मांगा
NGT ने भोपाल नगर निगम और डीएफओ से पिछले पांच वर्षों में लगाए गए पौधों का विस्तृत रिकॉर्ड भी तलब किया है। अधिकरण ने कहा कि सिर्फ पौधों की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। संबंधित विभागों को लगाए गए पौधों की औसत ऊंचाई और औसत मोटाई की स्पष्ट जानकारी भी प्रस्तुत करनी होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि पौधारोपण के बाद पौधे वास्तव में विकसित हुए या नहीं। NGT ने कागजी आंकड़ों के बजाय जमीनी स्थिति को महत्व देते हुए रिकॉर्ड को वास्तविक निरीक्षण और पौधों की स्थिति से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इससे पौधारोपण की गुणवत्ता और उसकी निगरानी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
80 हजार पौधों की तस्वीरें भी तलब
NGT ने भोपाल में करीब 80 हजार पौधों से जुड़े रिकॉर्ड और साइट-वार तस्वीरें भी मांगी हैं। केंद्रीय साधिकार प्राप्त समिति यानी CEC के निर्देशों के अनुसार सड़क किनारे और मीडियन पर लगाए जाने वाले 10 हजार पेड़ों की जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा भोपाल कलेक्टर द्वारा हुजूर तहसील में आवंटित भूमि पर 70 हजार वृक्षारोपण की साइट-वार तस्वीरें भी पेश करने को कहा गया है। अधिकरण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रिकॉर्ड में दर्ज पौधारोपण वास्तव में जमीन पर हुआ है या नहीं और पौधों की मौजूदा स्थिति कैसी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक और MPPCB को इस संबंध में 30 दिन का समय दिया गया है।
NGT ने जैव-चिकित्सीय कचरे पर भी दिए निर्देश
भोपाल में जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के खुले में फेंके जाने और जलाए जाने के मामले में भी NGT ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मामला RTO परिसर के पीछे रानी अवंतीबाई ट्रांसपोर्ट नगर के खुले स्थान पर एक्सपायर्ड दवाइयों, दवा की स्ट्रिप, सिरप की बोतलों और इंजेक्शन की शीशियों समेत जैव-चिकित्सीय कचरा फेंके जाने से जुड़ा था। संयुक्त समिति की रिपोर्ट के मुताबिक मौके से कचरा हटाकर अधिकृत कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी को सौंपा गया। करीब 5.2 किलोग्राम एक्सपायर्ड दवाइयों का इंसीनरेशन के जरिए निपटान किए जाने की पुष्टि हुई। बाद के निरीक्षण में स्थल खाली मिला।
मेडिकल वेस्ट वाहनों की GPS से होगी निगरानी
NGT ने जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के परिवहन को लेकर भी कई निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने कहा कि कचरा ले जाने वाले वाहनों में GPS की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि ऑनलाइन और रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सके। वाहनों में चालक और कर्मचारियों तथा रंग-कोडित जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट कंटेनरों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए। कचरा रखने वाला केबिन लीकेज-रोधी होना जरूरी है और वाहन पर Bio-Hazard का चिन्ह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। वाहनों का वैध पंजीयन और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र भी अनिवार्य होगा। अपशिष्ट के परिवहन के लिए उचित मार्ग तय करने और संभव हो तो कम यातायात वाले समय में परिवहन करने के निर्देश दिए गए हैं।
48 घंटे में करना होगा अपशिष्ट का निपटान
NGT ने स्पष्ट किया कि जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के उत्पन्न होने से लेकर उसके उपचार और अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया 48 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। MPPCB को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों के पास आवश्यक अनुमति और अधिकृत CBWTF की सदस्यता हो। नियमों का पालन नहीं करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम को घरेलू और अस्पतालों से निकलने वाले जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के संग्रहण और निपटान की व्यवस्था मजबूत करने के साथ जन-जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कचरा मिक्स करने पर रोक, निगरानी बढ़ाने के निर्देश
NGT ने भोपाल नगर निगम को स्रोत स्तर पर घरेलू स्वास्थ्य संबंधी कचरे का प्रभावी पृथक्करण और अलग संग्रहण सुनिश्चित करने को कहा है। इस कचरे को नियमित रूप से अधिकृत CBWTF तक पहुंचाना होगा। संग्रहण और परिवहन के दौरान जैव-चिकित्सीय कचरे के दूसरे कचरे के साथ मिश्रित होने या अनधिकृत स्थान पर फेंके जाने की संभावना को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकरण ने खुले में कचरा जलाने और खुले स्थानों पर कचरा फेंकने की घटनाओं पर भी रोक लगाने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।