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37 करोड़ की अधूरी योजना बनी अभिशाप, पानी की किल्लत से त्रस्त वार्ड के लोग CMO कार्यालय पहुंच कर नारेबाजी कर रहे प्रदर्शन

37 करोड़ की अधूरी योजना बनी अभिशाप पानी की किल्लत से त्रस्त वार्ड के लोग cmo कार्यालय पहुंच कर नारेबाजी कर रहे प्रदर्शन

Incomplete water supply project Chhattisgarh : रायपुर के खैरागढ़ क्षेत्र में करीब 10 साल पुरानी 37 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना अभी तक अधूरी है। योजना के तहत छिंदारी डेम (रानी रश्मिदेवी जलाशय) से पानी पाइपलाइन के ज़रिए पूरे शहर में पहुंचाना था, लेकिन कार्य में देरी और गलत तरीके से पाइपलाइन बिछाने के कारण स्थानीय लोगों को अब तक पानी की एक बूंद भी नहीं मिली है। गलियों में बिछाई गई पाइपें सूखी पड़ी हैं, जिससे वार्डवासियों में भारी आक्रोश है।

जनता का सीएमओ कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन

वार्डवासियों ने ये समस्या लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय का रुख किया और नारेबाजी के साथ विरोध प्रर्दशन किया। उनका कहना है कि जल संकट के कारण उनके जीवन पर विपरीत असर पड़ा है। उन्होंने अधिकारीयों की कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया है और जल्द समाधान की मांग की है। प्रदर्शन में कई वार्डों के लोग शामिल थे, जिनकी शिकायतें समान हैं—पानी की कमी, जलभराव, गड्ढे इत्यादि।

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Incomplete water supply project Chhattisgarh : निगम की ओर से दी गई जानकारी

नगर निगम ने बताया कि जलापूर्ति अब लालपुर स्टाफ डेम से की जाएगी जिसके लिए अतिरिक्त 2 करोड़ 46 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं। हालांकि स्थानीय नागरिक इसे ठीक प्रकार से लागू करने पर शंका जता रहे हैं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि अधूरी पाइपलाइन के कारण समस्या उत्पन्न हुई, क्योंकि पहले डेम से मुख्य पाइपलाइन बिछानी थी, पर सीधे शहर के अंदर पाइप डाल दिए गए थे।

जल संकट का व्यापक असर और भविष्य की चुनौतियां

बारिश के मौसम में जलभराव की समस्याएं बढ़ जाती हैं। खैरागढ़ के कई वार्डों में जल निकासी की व्यवस्था ठीक न होने और अधूरी नालियों के कारण चार से पांच फुट तक पानी जमा हो जाता है। इससे ना केवल रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी उत्पन्न हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने नगरपालिका से शीघ्र सुधार की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान न हुआ तो आंदोलन तेज होगा।

37 करोड़ की इस अधूरी जल योजना ने जनता के लिए अभिशाप का रूप ले लिया है। सरकारी तंत्र की सुस्ती और गलत प्रबंधन ने जल संकट को गंभीर बना दिया है। जरूरत है कि जल्द से जल्द सही दिशा में कार्य हो ताकि लोगों को मूलभूत सुविधा पानी मिल सके और इलाके में शांति बनी रहे।

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