मंत्री प्रतिमा बागरी की कुर्सी पर संकट? जाति प्रमाणपत्र जांच के लिए गांव में पिटेगी ‘डोंडी’

मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति जांच

मंत्री प्रतिमा बागरी की कुर्सी पर संकट? जाति प्रमाणपत्र जांच के लिए गांव में पिटेगी ‘डोंडी’

मध्य प्रदेश की नगरीय विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के SC प्रमाणपत्र की वैधता पर जांच तेज हुई, 6 जुलाई को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।

मंत्री प्रतिमा बागरी की कुर्सी पर संकट जाति प्रमाणपत्र जांच के लिए गांव में पिटेगी ‘डोंडी’

भोपाल।मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में नगरीय विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर मामला गहराता जा रहा है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जांच तेज किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी कर 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

वह समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सके

जानकारी के अनुसार, छानबीन समिति ने अपने आदेश में सतना कलेक्टर को निर्देश दिया है कि मंत्री के मूल गांव और क्षेत्र में ‘डोंडी’ पिटवाकर यानी सार्वजनिक मुनादी के जरिए नोटिस की जानकारी दी जाए। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय लोगों को जांच की जानकारी मिले और यदि किसी के पास जाति संबंधी कोई साक्ष्य या आपत्ति हो, तो वह समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सके।

वे ‘बागरी’ अनुसूचित जाति से संबंधित हैं

समिति ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि मंत्री प्रतिमा बागरी को वर्ष 1950 की स्थिति के आधार पर अपने मूल निवास और जातिगत प्रमाण से जुड़े दस्तावेज पेश करने होंगे। उन्हें ऐसे ऐतिहासिक और मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, जो यह साबित कर सकें कि उनका परिवार 1950 से पहले सतना जिले में निवासरत है और वे ‘बागरी’ अनुसूचित जाति से संबंधित हैं।

इस प्रकरण में बड़ा फैसला सामने आ सकता है

प्रतिमा बागरी सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से विधायक हैं, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वे वर्तमान में राज्य सरकार में नगरीय विकास राज्य मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में यह जांच उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

यदि 6 जुलाई को होने वाली सुनवाई में मंत्री आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रहती हैं, तो उनका जाति प्रमाणपत्र निरस्त हो सकता है। ऐसी स्थिति में उनकी विधानसभा सदस्यता और मंत्री पद दोनों पर संकट खड़ा हो सकता है।

फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और सभी की नजरें 6 जुलाई की पेशी पर टिकी हुई हैं, जहां इस प्रकरण में बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
 

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