मध्य प्रदेश में इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के बाद राज्य सरकार ने 24 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर ली है। सबसे अधिक चिंता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह संभाग उज्जैन को लेकर जताई जा रही है, जहां वर्षा में सबसे ज्यादा कमी रहने की संभावना है।
मुकाबले केवल 92.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई
1 जून से 1 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य 139.7 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 92.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई, यानी करीब 47 मिमी की कमी रही। कई जिलों में पहले ही 20 से 60 प्रतिशत तक वर्षा घाटा दर्ज हो चुका है। यदि जुलाई और अगस्त में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।
मौसम आधारित खेती की सलाह दी जाएगी
संभावित संकट को देखते हुए सरकार ने कृषि और राजस्व विभाग को संयुक्त कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। सात जिलों में विस्तृत माइक्रो प्लानिंग की जाएगी और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से लगातार तकनीकी निगरानी रखी जाएगी। किसानों को मोबाइल, सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों से मौसम आधारित खेती की सलाह दी जाएगी।
फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी
सरकार किसानों को कम अवधि और कम पानी वाली फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज का रकबा बढ़ाने पर जोर रहेगा। साथ ही रिज एंड फरो, रेज्ड बेड और डायरेक्ट सीडेड राइस जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि कम पानी में भी उत्पादन प्रभावित न हो।
बीज और सिंचाई के लिए वैकल्पिक फसलों के पर्याप्त बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। मनरेगा के माध्यम से खेत तालाब, जल संरक्षण और सिंचाई संरचनाओं के निर्माण व मरम्मत पर काम होगा। यदि सूखे की स्थिति बनती है तो सरकार वर्ष 2020 की सूखा नीति के तहत राहत और सहायता की कार्रवाई करेगी।