मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है, लेकिन इसके आगामी मानसून सत्र में पेश होने की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही है। वजह यह है कि सरकार ने UCC का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है, जबकि विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को ही समाप्त हो जाएगा।
कार्यकाल विस्तार किया गया
विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा 30 जून को जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि समिति के सदस्य सचिव के अनुरोध और ड्राफ्ट तैयार करने में हो रही प्रगति को देखते हुए कार्यकाल विस्तार किया गया है। इसके चलते इस सत्र में विधेयक पेश होने की उम्मीद कमजोर हो गई है।
कानून लागू करने का प्रस्ताव शामिल
सूत्रों के अनुसार, तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा गुजरात मॉडल पर आधारित है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर सभी समुदायों के लिए एक समान कानून लागू करने का प्रस्ताव शामिल है।
विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया जा चुका
हालांकि, इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयानों के बाद अटकलें बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि जुलाई के मानसून सत्र में UCC को लेकर बड़ा कदम उठाया जा सकता है। इसके अलावा 2 जुलाई को उनके समक्ष UCC ड्राफ्ट का विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया जा चुका है।
ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि भले ही समिति का कार्यकाल बढ़ा दिया गया हो, लेकिन सरकार अंतिम चरण में ड्राफ्ट को तेजी से पूरा कर विधेयक पेश करने की कोशिश कर सकती है।
फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन समिति के कार्यकाल विस्तार ने विधानसभा सत्र में UCC के आने को लेकर अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है।