वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर बोले रामेश्वर शर्मा-'गंगा-जमुनी त...

हिंदू सदस्य वक्फ बोर्ड में

वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर बोले रामेश्वर शर्मा-'गंगा-जमुनी तहजीब है तो आपत्ति क्यों?'

मध्यप्रदेश में वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति हुई है। इस निर्णय का बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने समर्थन किया, जिससे राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।

वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर बोले रामेश्वर शर्मा-गंगा-जमुनी तहजीब है तो आपत्ति क्यों

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों की नियुक्ति के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जब देश की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता से है, तो वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

इस व्यवस्था को लागू करने वाला देश का पहला राज्य

भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान हुजूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि वर्ष 2025 में लागू हुए नए वक्फ अधिनियम के तहत मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के अनुसार प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है और मध्यप्रदेश इस व्यवस्था को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

सभी समुदायों की भागीदारी का स्वागत

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां भारत की भूमि हैं और उनका उपयोग समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों के हित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये संपत्तियां किसी एक व्यक्ति या किसी विशेष वर्ग की निजी संपत्ति नहीं हैं। उनके अनुसार, यदि सभी लोग गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं, तो सभी समुदायों की भागीदारी का स्वागत किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार सरकार बिना किसी भेदभाव के गरीबों के राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाएं संचालित करती है, उसी भावना के साथ वक्फ बोर्ड में भी व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। उनके मुताबिक, बोर्ड में शामिल किए गए हिंदू सदस्य भी गरीबों और जनहित के दृष्टिकोण से कार्य करेंगे।

जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करना है

बीजेपी विधायक ने यह भी कहा कि इस फैसले से आम मुस्लिम समाज को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, आपत्ति केवल उन लोगों को हो सकती है जो वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग या अनियमितताओं से लाभ उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए कानून और नए बोर्ड का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करना है।

गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के लागू होने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए पहली बार दो हिंदू सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया है, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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