हिमाचल हाईकोर्ट से सुक्खू सरकार को झटका, पंचायतों को समय से पहले भंग करने के फैसले पर अंतरिम रोक

हाईकोर्ट का हिमाचल सरकार को झटका

हिमाचल हाईकोर्ट से सुक्खू सरकार को झटका, पंचायतों को समय से पहले भंग करने के फैसले पर अंतरिम रोक

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लाहौल-स्पीति और चंबा जिले की पंचायतों के भंग करने पर रोक लगाई, वर्तमान प्रतिनिधियों को पदों पर बने रहने की अनुमति दी।

हिमाचल हाईकोर्ट से सुक्खू सरकार को झटका पंचायतों को समय से पहले भंग करने के फैसले पर अंतरिम रोक

हिमाचल हाईकोर्ट से सुक्खू सरकार को झटका, पंचायतों को समय से पहले भंग करने के फैसले पर अंतरिम रोक | None

हिमाचल प्रदेश सरकार को पंचायतों के मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत लाहौल-स्पीति के केलांग और चंबा जिले के पांगी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को उनके निर्धारित कार्यकाल से पहले भंग कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने फिलहाल मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने पदों पर बने रहने और जिम्मेदारियां निभाते रहने की अनुमति दी है।

हिमाचल सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू

कोर्ट ने पांच साल के कार्यकाल को बताया संवैधानिक अधिकार

मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को संविधान के तहत मिले पांच वर्ष के कार्यकाल का अधिकार है। प्रथम दृष्टया अदालत ने माना कि सरकार का फैसला इस संवैधानिक अधिकार को प्रभावित करता है, इसलिए 24 जून 2026 की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगाना आवश्यक है।

याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को दी थी चुनौती

यह मामला दीपक चौहान और अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की ओर से दायर याचिका पर सामने आया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वर्ष 2021 में चुनी गई पंचायतों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक वैध है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर मई 2026 में नए पंचायत चुनाव जरूर कराए गए, लेकिन इससे वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल स्वतः समाप्त नहीं हो जाता।

सरकार की अधिसूचना में बदलाव पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि राज्य सरकार ने 6 जून 2026 की अधिसूचना में नव-निर्वाचित पंचायतों की पहली बैठक 18 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की थी। हालांकि, बाद में 24 जून को नई अधिसूचना जारी कर पहली बैठक की तारीख 27 जून कर दी गई और मौजूदा पंचायतों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला ले लिया गया। अदालत ने माना कि इस बदलाव से मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार प्रभावित होते हैं।

सरकार को नोटिस, अगली सुनवाई 12 अगस्त को

हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को होगी। तब तक केलांग और पांगी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधि अपने पदों पर बने रहेंगे और अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।

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