हरियाणा में चीनी मिलों का आधुनिकीकरण

हरियाणा की 10 चीनी मिलों का होगा कायाकल्प, CM सैनी ने जारी किया आधुनिकीकरण का रोडमैप; किसानों को भी बड़ा तोहफा

हरियाणा सरकार ने 10 सहकारी चीनी मिलों का आधुनिकीकरण करने का रोडमैप जारी किया, जिसमें तकनीकी उन्नति और आर्थिक मजबूती पर जोर दिया गया है।

By : रोहन उमक
हरियाणा की 10 चीनी मिलों का होगा कायाकल्प, CM सैनी ने जारी किया आधुनिकीकरण का रोडमैप; किसानों को भी बड़ा तोहफा

हरियाणा की 10 चीनी मिलों का होगा कायाकल्प, CM सैनी ने जारी किया आधुनिकीकरण का रोडमैप; किसानों को भी बड़ा तोहफा

हरियाणा सरकार ने राज्य की सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य की 10 सहकारी चीनी मिलों के व्यापक आधुनिकीकरण का रोडमैप जारी करते हुए तकनीक, मशीनरी, गन्ना कटाई और मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य केवल पेराई सत्र के दौरान मिलों को संचालित करना नहीं, बल्कि ऑफ-सीजन में भी इन परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कर आय के नए स्रोत विकसित करना है।

मुख्यमंत्री ने चार फुट कतार दूरी (रो स्पेसिंग) अपनाने वाले गन्ना किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की भी घोषणा की। अब ऐसे किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ के बजाय 5,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

रोडमैप जारी करते हुए सीएम सैनी

बिजली उत्पादन से लेकर नए राजस्व स्रोतों पर जोर

आधुनिकीकरण योजना के तहत चीनी रिकवरी बढ़ाने, पेराई क्षमता में इजाफा करने, ऑफ-सीजन बिजली उत्पादन और आय के नए साधन विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सहकारी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाना है।

फेडरेशन के प्रबंध निदेशक कैप्टन शक्ति सिंह ने बताया कि रोहतक चीनी मिल गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद दवा कंपनियों को सिरप निर्माण के लिए चीनी की आपूर्ति कर सकती है। वहीं, HARHIT और वीटा आउटलेट्स के जरिये गुड़ की बिक्री बढ़ाने की योजना भी तैयार की जा रही है। करनाल और रोहतक की मिलें पहले से ही एक किलोग्राम के उपभोक्ता पैक में रिफाइंड चीनी बेच रही हैं।

किसानों को मिलेगा बेहतर गन्ना बीज

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को केंद्र द्वारा अनुमोदित उच्च उत्पादकता वाली गन्ने की किस्मों की उपलब्धता तेज करने के निर्देश दिए। राज्य में बीज का स्टॉक कम होने पर दूसरे राज्यों से बीज मंगाने और नई किस्मों की मांग तत्काल केंद्र के बीज पोर्टल पर भेजने को कहा गया है।

रोहतक, मेहम, पानीपत और करनाल की चीनी मिलों में चार टिश्यू कल्चर प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराना है।

कैथल में मशीनों से होगी गन्ने की कटाई

कैथल चीनी मिल में यंत्रीकृत गन्ना कटाई का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके तहत मशीनों से खेत में गन्ने की कटाई कर उसे सीधे मिल तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य कटाई मजदूरों की कमी की समस्या से निपटना है। सफल रहने पर इस मॉडल को अन्य चीनी मिलों में भी लागू किया जा सकता है।

वहीं, सोनीपत की पुरानी चीनी मिल को नए स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। हालांकि, नई मिल में स्थानांतरण पूरा होने तक मौजूदा मिल का संचालन और रखरखाव जारी रहेगा।

मिलों में स्टोर और मशीनरी प्रबंधन होगा बेहतर

मुख्यमंत्री ने सभी सहकारी चीनी मिलों में स्टोर मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। मशीनरी के रखरखाव के लिए केंद्रीकृत निविदा प्रणाली लागू करने को भी कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी एक मिल में जरूरी स्पेयर पार्ट उपलब्ध है, तो दूसरी मिल को उसे अलग से खरीदने के बजाय साझा व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए।

चीनी मिल

पेराई सत्र में मशीनों के बंद रहने के समय पर भी विशेष निगरानी होगी। मिलों के प्रबंध निदेशकों को मशीनों के ठप रहने के घंटों का रिकॉर्ड रखने, जरूरी स्पेयर पार्ट पहले से उपलब्ध कराने और समय पर रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। तकनीकी कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए पॉलिटेक्निक कॉलेजों और आईटीआई के साथ समन्वय किया जाएगा।

किसानों से सीधे संवाद पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने चार फुट रो स्पेसिंग योजना का व्यापक प्रचार करने को कहा। गन्ना तौल केंद्रों पर किसानों की शिकायतों और सुझावों के लिए सुझाव पेटियां लगाने तथा शिकायतों का तय समयसीमा में समाधान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रत्येक चीनी मिल के प्रबंध निदेशक को हर चार महीने में अपने क्षेत्र के गन्ना किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुनने को कहा गया है।

हरियाणा में पानीपत, रोहतक, करनाल, शाहाबाद, गोहाना, सोनीपत, जींद, पलवल, मेहम और कैथल में कुल 10 सहकारी चीनी मिलें हैं। इनकी संयुक्त गन्ना पेराई क्षमता 30,650 टन प्रतिदिन है। ये मिलें चीनी के साथ-साथ बिजली और इथेनॉल का भी उत्पादन करती हैं।

बैठक में सहकारिता मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, मुख्यमंत्री कार्यालय, सहकारिता और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मिल निदेशक तथा विभिन्न क्षेत्रों के गन्ना किसान मौजूद रहे।

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