CM डॉ यादव ने CM योगी को भेंट की वैदिक घड़ी, विश्वनाथ मंदिर में लगेगी

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CM डॉ यादव ने CM योगी को भेंट की वैदिक घड़ी, विश्वनाथ मंदिर में लगेगी

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Vedic Clock Kashi Vishwanath: वाराणसी में विक्रमोत्सव 2026 का भव्य महानाट्य का मंचन किया गया। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। CM डॉ मोहन यादव ने CM योगी को वैदिक घड़ी भेंट की। कल यह घड़ी विश्वनाथ मंदिर में लगाई जाएगी। 

विक्रमोत्सव 2026

विश्वनाथ मंदिर में लगेगी घड़ी

यह घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित है। इस घड़ी में दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है। कार्यक्रम की शुरुआत 21 कलाकारों ने मृदंगम की धुन पर प्रस्तुति कर की। वहीं इस दौरान कलाकारों ने मटका नृत्य भी प्रस्तुत किया। इस दौरान CM डॉ यादव ने कहा- इस आयोजन से 2 राज्यों के विकास और प्राकृतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। इस आयोजन के कलाकरों में कोई डॉक्टर, इंजीनियर, है, जो विक्रमादित्य के लिए समर्पित है।

‘3 भाइयों की जोड़ी’

CM ने कहा- 3 भाइयों की जोड़ी जगत में विख्यात है। भाइयों के बीच कैसा रिश्ता होना चाहिए, इसका उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की जोड़ी से मिलता है। उसी तरह भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य की जोड़ी भी उतनी ही प्रसिद्ध है। जब इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने आया, तो मेरा पहला सुझाव था कि इसका आयोजन वाराणसी में किया जाए। 

CM डॉ यादव

200 से ज्यादा कलाकार

वहीं CM योगी ने कहा- आज की मूवी में डकैतों को दिखाया जा रहा है। फिल्मोंं को देखा होगा। पहले तो सही को गलत और गलत को सही दिखाया जाता था। अब सही को सही दिखाया जाता है। अयोध्या को भी महाराज विक्रमादित्य ने ही खोजा था। उसके शास्त्रीय प्रमाण भी उन्होंने प्रस्तुत किए थे। इस भव्य महानाट्य में 200 से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ भारतीय परंपराओं और कलाओं का शानदार प्रदर्शन होगा। यह आयोजन हमारी संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।

CM योगी

Vedic Clock Kashi Vishwanath: क्या बोले CM?

Cm योगी ने कहा- काशी, बाबा विश्वनाथ की पावन धरा है, जो विश्व के नाथ हैं। वहीं उज्जैन महाकाल की नगरी है। यह याद रखना चाहिए कि जो काल का अनादर करता है, उसे महाकाल अपने अधीन कर लेते हैं। महाकाल की धरती का केंद्र यदि कहीं है, तो वह उज्जैन ही है, जहां वे साक्षात विराजमान हैं। उनकी कृपा उन सभी पर बरसती है, जो काल की गति को पहचानकर उसके अनुरूप ढलते हैं।

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