छत्तीसगढ़ में जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद एक की मौत, परिवार ने किया हंगामा

जुड़वा बच्चों की त्रासदी

छत्तीसगढ़ में जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद एक की मौत, परिवार ने किया हंगामा

छत्तीसगढ़ के कोरबा में जन्मे जुड़वा बच्चों में से एक की मौत हो गई। परिवार ने अस्पताल में हंगामा किया, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया।

छत्तीसगढ़ में जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद एक की मौत परिवार ने किया हंगामा

एक माँ ने 14 साल बाद दिया 2 जुड़वाँ बच्चों को जन्म,लेकिन परिवार की खुशियाँ मातम में बदल गई

हॉस्पिटल में जन्मे दो जुड़वा बच्चों में से एक नवजात की मौत हो गई। मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के शारदा विहार स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल से सामने आया परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।विवाद इतना बढ़ गया कि परिवार वाले स्टाफ की पिटाई के लिए पाइप तक उठा लिए। स्टाफ और परिजनों के बीच हाथापाई का वीडियो भी सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

आरोप है कि बच्चे को पीलिया था, डॉक्टरों ने सही समय पर इलाज नहीं किया और ना ही रेफर किया, जिससे बच्चे की जान चली गई। जबकि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर रेफर करने की बात कही है। दूसरे बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है।

14 साल बाद हुआ था बच्चा 

परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा की पत्नी ने 17 जुलाई को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। शादी के लगभग 14 साल बाद घर में बच्चों के आने से परिवार में खुशी का माहौल था। जन्म के समय दोनों बच्चों का वजन सामान्य था।

एक बच्चे का वजन 2 किलो था, जबकि दूसरे का वजन 2 किलो 700 ग्राम था। परिजनों ने बताया कि जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद नसबंदी भी करा दी गई। अब एक बच्चे की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरे की हालत गंभीर है।

ननद बोली- बच्चा पीला दिख रहा था

सुकन्या ओझा की ननद ने बताया कि जन्म के बाद बच्चे स्वस्थ थे। अगले ही दिन बच्चा पीला दिखने लगा। डॉक्टरों को बताने पर उन्होंने कहा कि सब नॉर्मल है। पीलिया होने की जानकारी देरी से दी गई। जब हालत बिगड़ी तो बच्चे को सब्जी भाजी की तरह पकड़ा दिया गया।

14 साल बाद हमारे इकलौते भाई के घर बच्चा हुआ था। जुड़वा बच्चे होने के बाद बच्चा बंद होने का ऑपरेशन (नसबंदी) भी करवा लिए। अब एक बच्चा नहीं रहा। दूसरे की हालत गंभीर है। ऐसे में हम क्या करेंगे।

अस्पताल प्रबंधन बोला

इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पीलिया के लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू किया गया था और स्थिति गंभीर होने पर ही बच्चे को रेफर किया गया।

डायरेक्टर ज्योति श्रीवास्तव ने कहा कि 

सुकन्या ओझा 3 साल पहले हमारे हॉस्पिटल में आई थीं। शादी के 14 साल बाद तक उन्हें संतान नहीं हुई थी। इलाज के बाद वह गर्भवती हुईं और यहीं उनकी डिलीवरी हुई।

जांच में पता चला कि बच्चे उल्टी स्थिति (ब्रीच पोजीशन) में थे। सावधानीपूर्वक डिलीवरी के बाद स्वस्थ जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। इनमें से एक बच्चे का वजन कम था। उसे पीलिया था। हमारे यहां इसके इलाज की सुविधा नहीं थी, इसलिए हमने उसे रेफर करने की सलाह दी।

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