अमेरिका-ईरान युद्ध : बढ़ते संघर्ष के बीच ताज़ा घटनाक्रम
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लगभग पांच महीने पहले शुरू होने के बाद अब अपने सबसे गंभीर दौर में से एक में पहुंच गया है। दोनों पक्ष मध्य पूर्व में लगभग हर रात हमले कर रहे हैं, और युद्धविराम की नाजुक व्यवस्था अब पूरी तरह से बिखर चुकी है।
मौजूदा स्थिति
अमेरिकी सेना ने इस सप्ताहांत तक ईरानी ठिकानों पर लगातार आठवीं रात हमले किए हैं, जिनमें एक निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला भी शामिल है। जवाब में ईरान ने घोषणा की है कि युद्धविराम को नियंत्रित करने वाला अंतरिम समझौता "स्थगित" कर दिया गया है, जबकि वह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों और हितों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।
इस नए संघर्ष की मानवीय कीमत दोनों ओर लगातार बढ़ रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना के अब तक 17 सैनिक मारे जा चुके हैं, जिनमें जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में कई सैनिकों की मौत या घायल होना शामिल है, जबकि इराक में एक और सैनिक मारा गया। वहीं ईरान की ओर से स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, जून के अंत में जब से युद्धविराम कमज़ोर पड़ना शुरू हुआ, तब से कम से कम 50 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 500 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
ईरान के अलावा, इस संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र में फैल चुका है। कुवैत में एक बिजली और विलवणीकरण (डिसैलिनेशन) संयंत्र पर दो दिनों में दो बार हमला हुआ है, एक व्यापारिक जहाज़ पर हमले में एक भारतीय नाविक की मौत की पुष्टि हुई है, और बहरीन, कतर, जॉर्डन तथा संयुक्त अरब अमीरात सहित खाड़ी देशों ने इस बढ़ते संघर्ष से जुड़े ईरानी मिसाइल, ड्रोन या जवाबी हमलों की सूचना दी है।
युद्ध की शुरुआत कैसे हुई
इस युद्ध की जड़ें 28 फरवरी, 2026 को उस समय तक जाती हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर एक समन्वित आश्चर्यजनक हमला किया, जिसे "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" नाम दिया गया। यह हमला वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता के बीच हुआ और इसका मुख्य लक्ष्य ईरान के नेतृत्व को पूरी तरह समाप्त करना था: शुरुआती घंटों में ही सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई शीर्ष अधिकारी मारे गए, साथ ही खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य भी इसमें मारे गए। जवाब में ईरान ने इज़राइल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिका-समर्थित खाड़ी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और हज़ारों ड्रोन दागे, जिससे पूरा क्षेत्र उस स्थिति में पहुंच गया जिसे कुछ लोग "तीसरा खाड़ी युद्ध" भी कह रहे हैं।
इस संघर्ष की जड़ें इससे कहीं अधिक गहरी हैं, जो 1979 की इस्लामी क्रांति और उसके बाद हुए बंधक संकट तक जाती हैं, और हाल के वर्षों में 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के टूटने तथा 2025-2026 में इसे फिर से बहाल करने के असफल प्रयासों से जुड़ी हैं। ईरान वर्षों के प्रतिबंधों और क्षेत्रीय झटकों के बाद काफी कमज़ोर स्थिति में इस युद्ध में उतरा था।
मारे गए सर्वोच्च नेता के पुत्र मोजतबा खामेनेई अब ईरान के नए सर्वोच्च नेता का पद संभाल चुके हैं।
बार-बार टूटता और बनता युद्धविराम
लड़ाई का पहला गहन चरण लगभग दो महीने की जंग के बाद 5 मई को समाप्त हुआ था। इसके बाद एक अस्थिर युद्धविराम प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से बार-बार उल्लंघन देखने को मिला:
- 7-8 अप्रैल : दो सप्ताह के एक सशर्त युद्धविराम की घोषणा की गई, जो ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से जुड़ा था, और इसके साथ एक व्यापक शांति ढांचे के आधार के रूप में ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव भी शामिल था।
- 21 अप्रैल : राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया।
- जून 2026 : अमेरिका और ईरान ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी हटाना था।
लेकिन यह समझौता टिक नहीं पाया। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण जताता रहा और जहाज़ों से तेहरान द्वारा तय किए गए मार्गों तथा नियमों का पालन करने की मांग करता रहा — आलोचकों का कहना है कि यह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग, जिससे दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, पर शुल्क वसूलने और दबाव बनाने का एक प्रयास था। 6 और 7 जुलाई को ईरान द्वारा कई व्यापारिक जहाज़ों पर गोलीबारी के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया, जिसके बाद ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से घोषणा की कि युद्धविराम "समाप्त" हो चुका है।
जुलाई में बढ़ती जंग
इसके बाद से यह युद्ध तेज़ी से बढ़ा है :
- अमेरिका ने एक बड़े हमले में एक ही रात में लगभग 140 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, और इसके बाद बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप और ईरानशहर जैसे शहरों में पुलों, बिजली संयंत्रों और सैन्य ठिकानों सहित बुनियादी ढांचे पर लगातार रात के हमले जारी रखे।
- ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर, और हाल ही में सीरिया में पूर्व अमेरिकी अड्डे अल-तंफ पर जवाबी हमलों का दावा किया है।
- अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है, और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को "अत्यंत असुरक्षित और पूरी तरह बंद" घोषित कर दिया है।
- इस घटनाक्रम के चलते तेल की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखा गया है — अमेरिकी क्रूड एक ही दिन में 9% से अधिक उछलकर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, हालांकि यह युद्ध के पहले के शिखर स्तर, जो 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था, से अभी भी काफी नीचे है। होर्मुज से होकर होने वाली शिपिंग बाधित होने के कारण कीमतें फिर से बढ़ रही हैं।
- ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी और सर्वोच्च नेता के सलाहकार ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले जारी रहने पर ईरान "पूर्ण पैमाने पर आक्रामक कार्रवाई" की ओर बढ़ेगा, वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर वाशिंगटन पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया है।
कूटनीतिक स्तर पर, कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रहे प्रयास अब तक युद्धविराम को फिर से बहाल करने में विफल रहे हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार ने कहा है कि तेहरान "पूर्ण रक्षा" के लिए तैयार है, लेकिन आत्मसमर्पण से इनकार किया है। इस बीच ईरान की आंतरिक राजनीति और अधिक अस्थिर हो गई है — कट्टरपंथी गुटों ने जून में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों पर इस्लामी गणराज्य के खिलाफ "मौन तख्तापलट" रचने का आरोप लगाया है, और रिपोर्टों के अनुसार दिवंगत सर्वोच्च नेता की एक अंत्येष्टि सभा में ईरान के शीर्ष राजनयिक को गुस्साई भीड़ का सामना करना पड़ा।
यह युद्ध पूरे क्षेत्र पर दबाव बनाए हुए है: लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई एक अलग अमेरिका-मध्यस्थता वाले युद्धविराम ढांचे के बावजूद जारी है, और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस महीने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठकों के लिए वाशिंगटन गए।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस संघर्ष की स्थिति को देखते हुए अमेरिकी नागरिकों, विशेष रूप से मध्य पूर्व में मौजूद लोगों से अधिक सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए एक वैश्विक चेतावनी जारी की है।
आगे क्या देखना होगा
युद्धविराम ढांचे के लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो जाने के साथ, आगे के मुख्य विवाद बिंदु संभवतः ये बने रहेंगे :
- होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां शिपिंग मार्गों पर नियंत्रण किसी स्थायी समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
- खाड़ी देशों की सुरक्षा, क्योंकि कुवैत, बहरीन, कतर, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अमेरिकी सहयोगी देश ईरानी जवाबी हमलों को झेल रहे हैं।
- ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिरता, क्योंकि कट्टरपंथी गुट वाशिंगटन के साथ वार्ता करने वाले अधिकारियों की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं।
- तेल बाजार, जो खाड़ी क्षेत्र की शिपिंग लाइनों में किसी भी और व्यवधान के प्रति अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
क्या कतर, पाकिस्तान या किसी अन्य पक्ष की नई मध्यस्थता कोई आंशिक शांति भी बहाल कर पाएगी, यह अभी अनिश्चित है। फिलहाल, दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि वे बातचीत की मेज़ पर लौटने के बजाय लड़ाई जारी रखने का इरादा रखते हैं।
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*यह लेख 20 जुलाई, 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टिंग को दर्शाता है। इस संघर्ष की तेज़ी से बदलती प्रकृति को देखते हुए, पाठकों को नवीनतम घटनाक्रम के लिए प्रमुख समाचार एजेंसियों और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों की लाइव कवरेज देखने की सलाह दी जाती है।*