भोपाल में सरकारी अस्पतालों के लिए लेप्रोस्कोपी मशीनों और अस्पताल फर्नीचर की खरीदी में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक फर्म ने जाली दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किया और करीब तीन साल तक सरकारी सप्लाई करती रही। वहीं दूसरी फर्म द्वारा सप्लाई किए गए फर्नीचर की गुणवत्ता भी जांच में मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
दोनों फर्मों से 70-75 करोड़ की खरीदी
मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉरपोरेशन ने मेसर्स डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को लेप्रोस्कोपी यूनिट और उपकरणों की सप्लाई का ठेका दिया था। इस फर्म से करीब 50 करोड़ रुपये की खरीदी की गई। वहीं मेसर्स इनलाइन मेडिकेयर से अस्पतालों के लिए फर्नीचर समेत अन्य सामग्री की करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की खरीदी हुई।
ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा
मामले की शिकायत मई 2026 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW को मिली थी। जांच के बाद EOW ने कॉरपोरेशन से दोनों फर्मों से जुड़ी जानकारी मांगी। इसके बाद डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स के टेंडर दस्तावेजों में लगाए गए मैन्युफैक्चरर्स ऑथोराइजेशन फॉर्म का क्रॉस वेरिफिकेशन कराया गया।
जाली MAF सामने आने के बाद कार्रवाई
क्रॉस वेरिफिकेशन में संबंधित निर्माता की ओर से MAF को जाली बताया गया। कॉरपोरेशन ने फर्म से जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद कार्रवाई की गई। डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स के सभी अनुबंध निरस्त कर उसे दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया।
फर्नीचर की गुणवत्ता भी सवालों में
इनलाइन मेडिकेयर द्वारा सप्लाई किए गए फर्नीचर की जांच में भी कई कमियां सामने आईं। जांच में जंग, डेंट, खराब वेल्डिंग और निर्धारित मानकों से अलग सामग्री मिलने की बात सामने आई। कई सामानों में निर्माता की मार्किंग और जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं पाए गए।
एमडी ने की कार्रवाई, फिर हुआ तबादला
कॉरपोरेशन के तत्कालीन एमडी मयंक अग्रवाल ने इनलाइन मेडिकेयर को डीबार करते हुए धरोहर राशि राजसात की। इसके बाद डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स को ब्लैकलिस्ट किया गया और उसके अनुबंध रद्द कर दिए गए। कार्रवाई के बाद एमडी मयंक अग्रवाल को कॉरपोरेशन से हटा दिया गया और अवि प्रसाद को नया एमडी बनाया गया।
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
करीब तीन साल तक जाली दस्तावेजों की जांच नहीं होने और फर्नीचर की गुणवत्ता समय पर नहीं परखे जाने से तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नए एमडी अवि प्रसाद ने कहा है कि सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा और जांच व इंस्पेक्शन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा।