RAJASTHAN NEWS : यूपी,पंजाब के बाद राजस्थान पराली जलानें में चौथे स्थान पर

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RAJASTHAN NEWS : यूपी,पंजाब के बाद राजस्थान पराली जलानें में चौथे स्थान पर

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Rajasthan stubble burning fourth rank India : राजस्थान में पराली जलाने की घटनाओं ने प्रदेश की आबोहवा को गंभीर रूप से जहरीला बना दिया है, और राजस्थान अब देशभर में चौथे स्थान पर आ गया है। हाल के दिनों की आंकड़े और विशेषज्ञों की राय इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ाते हैं।​

पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं

पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान—इन चार राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज हुई हैं। राजस्थान ने 15 सितंबर से 23 अक्टूबर 2025 के बीच 335 घटनाओं के साथ चौथा स्थान हासिल किया। श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़ और जयपुर जिले प्रदूषण स्तर के लिहाज से सबसे ज्यादा संकटग्रस्त बने हुए हैं।​

जहरीली आबोहवा का खतरा

पराली जलाने से पैदा हुए धुएं में हानिकारक गैसें—कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और पर्टिकुलेट मैटर—की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इसकी वजह से राजस्थान के कई शहरों का AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 400 से ऊपर रिकॉर्ड हुआ, जो अत्यंत खतरनाक श्रेणी है। जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और बार-बार खांसी जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं।​

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स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर

विशेषज्ञों का कहना है, कि पराली के धुएं से बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों की स्थिति बेहद खराब हो जाती है। लगातार प्रदूषित हवा में रहने से अस्थमा, फेफड़ों के रोग, हृदय रोग और आंखों में संक्रमण का खतरा बेहद बढ़ जाता है। स्थानीय अस्पतालों में बीमारी के ऐसे केस तेजी से बढ़ रहे हैं।​

प्रशासन और न्यायालय का हस्तक्षेप

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान समेत अन्य प्रभावित राज्यों को पराली जलाने पर नियंत्रण लागू करने के निर्देश दिए हैं। कुछ जिलों में प्रशासन ने पराली जलाने पर जुर्माना और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए जागरूकता और तकनीकी सहायता की जरूरत बनी हुई है।​

समाधान की  राह

राजस्थान के कुछ इलाकों जैसे अनूपगढ़ में किसान अब पराली जलाने के बजाय इसे नई तकनीक के माध्यम से फैक्ट्रियों को बेच रहे हैं, जिससे आय भी बढ़ रही है और प्रदूषण भी कम हो रहा है। यह मॉडल बाकी जिलों और राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।​

राजस्थान में पराली जलाने की समस्या से सांस लेने लायक हवा का संकट दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. प्रशासन, सरकार और किसान—सभी को मिलकर पराली प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि जनता की सेहत और पर्यावरण को बचाया जा सके.

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