माघ मेला: पुलिस ने रोका शंकराचार्य का रास्ता, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कौन हैं?

swami-avimukteshwaranand-biography-shankaracharya

माघ मेला: पुलिस ने रोका शंकराचार्य का रास्ता, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कौन हैं?

माघ मेला पुलिस ने रोका शंकराचार्य का रास्ता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कौन हैं

प्रयागराज माघ मेला विवाद: प्रयागराज माघ मेला में तनाव, शंकराचार्य का मार्ग रोका गया

प्रयागराज माघ मेला विवाद: प्रयागराज के माघ मेले में रविवार की सुबह हर किसी के दिल में भक्ति का संचार था. मौनी अमावस्या के लिए संगम पर स्नान का माहौल बना था, लेकिन इसी पावन माहौल में एक बड़ी घटना ने सबका ध्यान खींच लिया, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया और विवाद छिड़ गया ।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कौन हैं?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जीवन परिचय जन्म से शंकराचार्य बनने तक की यात्रा । जानिए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की पूरी कहानी ।

उत्तर प्रदेश के गांव से ज्योतिष पीठ तक का सफर

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज देश के चर्चित धार्मिक नेताओं में गिने जाते हैं, वे उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित ज्योतिष पीठ के वर्तमान शंकराचार्य हैं. उनकी पहचान केवल एक पीठाधीश्वर तक सीमित नहीं है, बल्कि वे परंपरा, विचार और स्पष्ट राय के लिए भी जाने जाते हैं ।

उनका जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था. जन्म के समय उनका नाम उमाशंकर उपाध्याय रखा गया। साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे उमाशंकर का जीवन आगे चलकर एक अलग ही दिशा में मुड़ गया ।

आठ साल की उम्र में छोड़ा घर

उमाशंकर ने कक्षा छह तक की पढ़ाई गांव में ही की। इसके बाद परिवार ने उन्हें आगे की शिक्षा के लिए बाहर भेजने का फैसला किया.  एक बार उनके पिता उन्हें गुजरात लेकर गए, वहीं उनकी मुलाकात काशी के संत रामचैतन्य से हुई ।

यहीं से उनकी जीवन यात्रा बदल गई। पिता ने उन्हें संत के सान्निध्य में छोड़ दिया । उस वक्त उमाशंकर की उम्र सिर्फ आठ साल थी। उसी उम्र में उन्होंने घर  परिवार और सामान्य जीवन से दूरी बना ली ।

गुजरात से काशी तक की साधना

गुजरात में करीब पांच साल तक रहकर उन्होंने पूजा-पाठ, अनुशासन और प्रारंभिक शास्त्रीय शिक्षा प्राप्त की, इसके बाद वे काशी पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात प्रसिद्ध संत स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से हुई ।

काशी में रहते हुए उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से विधिवत शिक्षा ग्रहण की, यहीं पर उनकी वैदिक और दार्शनिक समझ को एक ठोस आधार मिला ।

दीक्षा और शंकराचार्य परंपरा से जुड़ाव

साल 2000 में उमाशंकर ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से दीक्षा ली और संन्यास जीवन को पूरी तरह स्वीकार किया. दीक्षा के बाद वे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कहलाए और अपने गुरु के प्रमुख शिष्यों में गिने जाने लगे । स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का करीब तीन साल पहले निधन हो गया। उनके निधन के बाद शंकराचार्य परंपरा के अनुसार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नियुक्त किया गया ।

संबंधित सामग्री

लुधियाना सिविल अस्पताल में दो गुटों की खूनी झड़प, ईंट-पत्थर और हथौड़ों से हमला

राज्य

लुधियाना सिविल अस्पताल में दो गुटों की खूनी झड़प, ईंट-पत्थर और हथौड़ों से हमला

लुधियाना के सिविल अस्पताल में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें ईंट-पत्थर चले और वाहनों को नुकसान पहुंचा।

जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल की मांग, CM भगवंत मान ने राज्यपाल को लिखा पत्र

राज्य

जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल की मांग, CM भगवंत मान ने राज्यपाल को लिखा पत्र

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जगतार सिंह हवारा को उसकी बीमार मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल देने की अपील की है।

CM योगी की हुंकार: राष्ट्र प्रतीकों का अपमान अब नहीं चलेगा, तिरंगा यात्रा में दिया कड़ा संदेश

राज्य

CM योगी की हुंकार: राष्ट्र प्रतीकों का अपमान अब नहीं चलेगा, तिरंगा यात्रा में दिया कड़ा संदेश

लखनऊ में स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित 'तिरंगा यात्रा' में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं की राष्ट्रभक्ति की सराहना की।

MP के आसमान में आज से 4 नई उड़ानें,  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे शुभारंभ

राज्य

MP के आसमान में आज से 4 नई उड़ानें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे शुभारंभ

मध्यप्रदेश में चार नए सीधे हवाई मार्ग शुरू होंगे, जिससे राज्य की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा का समय कम होगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- जेन-जी को भटकाने की कोशिश हुई

देश-विदेश

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- जेन-जी को भटकाने की कोशिश हुई

धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, NEET पेपर लीक प्रदर्शन के बाद।