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Shiva and Bhasma Connection: शिव और भस्म का रहस्यमय संबंध – क्यों मृत्यु को भी गले लगाते हैं महादेव?

By : Hema Gupta
Shiva and Bhasma Connection: शिव और भस्म का रहस्यमय संबंध – क्यों मृत्यु को भी गले लगाते हैं महादेव?
Shiva and Bhasma Connection: भगवान शिव के कई नाम है, और इन्हे मृत्यु के देवता भी कहा जाता है। लेकिन वे केवल विनाशकारी शक्ति ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना और वैराग्य के प्रतीक भी हैं। उनके शरीर पर जो भस्म (विभूति) लिपटी होती है, वह केवल एक सजावट नहीं बल्कि इसके पीछे गहन आध्यात्मिक रहस्य छिपा हुआ है। Read More: Sawan Shivling Puja Rules: सावन में शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें, लग सकता है भारी दोष! भस्म, जिसे विभूति कहा जाता है, भगवान शिव का प्रमुख श्रृंगार है। वह इसे न केवल शरीर पर लगाते हैं बल्कि इसे अपने अस्तित्व का हिस्सा बनाते हैं। यह हमें नश्वरता की याद दिलाता है – कि जीवन क्षणभंगुर है और अंततः एक दिन सब कुछ भस्म हो जाना है।

शब्दों में छिपा अर्थ: 'भ' और 'स्म'

संस्कृत के अनुसार, भस्म दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘भ’ का अर्थ होता है नाश और ‘स्म’ का अर्थ होता है स्मरण। इसका तात्पर्य है – नश्वर संसार के नाश का स्मरण। जब हम भस्म को शरीर पर लगाते हैं, तो यह हमें याद दिलाता है कि एक दिन यह शरीर मिट्टी में मिल जाएगा, और आत्मा ही शाश्वत है।

शिव क्यों लगाते हैं भस्म?

भगवान शिव के जीवन का हर पहलू वैराग्य और तात्विक समझ से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों में कहा गया है कि शिवजी श्मशानवासी हैं, क्योंकि वे संसार के मोह से परे हैं। वे इस संसार के अंत को भी उत्सव के रूप में स्वीकारते हैं। वे भस्म इसलिए लगाते हैं क्योंकि यह जीवन के अंत – मृत्यु – का प्रतीक है, और शिव उसे भी सहजता से स्वीकारते हैं। शिव पुराण के अनुसार, भस्म को धारण करना पापों का नाश करता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

भस्म धारण करने के क्या लाभ होते हैं?

1. पापों का नाश – शिव पुराण में वर्णित है कि भस्म धारण करने से सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। 2. शिव का आशीर्वाद – जो भक्त भस्म को श्रद्धा से लगाता है, वह भगवान शिव की कृपा का पात्र बनता है। 3. शारीरिक और आत्मिक बल – यह शरीर को ऊर्जा देता है और आत्मा को शुद्ध करता है। 4. मृत्यु का भय दूर करता है – भस्म यह स्मरण कराती है कि मृत्यु भी एक सत्य है जिसे भय नहीं, समझदारी से अपनाना चाहिए।

महिलाएं क्यों नहीं चढ़ातीं भस्म?

कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्त्रियों को शिवलिंग पर भस्म नहीं चढ़ानी चाहिए। इसे अशुभ माना गया है क्योंकि भस्म मृत्यु का प्रतीक है और स्त्रियों का स्वभाव पोषण और सृजन का माना गया है। हालांकि, यह पूर्णतः श्रद्धा और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।

पौराणिक कथाओं में भस्म की महिमा..

धार्मिक ग्रंथों में भस्म से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ राख नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधन है।

राम नाम और शव यात्रा कथा...

एक बार शिवजी ने देखा कि लोग 'राम नाम' का जाप करते हुए शव यात्रा ले जा रहे हैं। उन्होंने राम नाम की महिमा को स्वीकारते हुए चिता के शांत होने के बाद वहां गए और उस चिता की भस्म को अपने शरीर पर लगा लिया। यह दिखाता है कि ईश्वर का नाम और मृत्यु की भस्म – दोनों को शिव समान महत्व देते हैं।

सती की भस्म से जुड़ी कथा...

एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब सती का वियोग सहन नहीं हुआ, तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती की देह को भस्म कर दिया। तब महादेव ने उसी भस्म को अपने शरीर पर धारण कर लिया। यह उनकी अनंत प्रेम भावना और वैराग्य का प्रमाण है।  

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