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राजस्थान विधानसभा में RIMS और मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक पारित: जयपुर में AIIMS की तर्ज पर RIMS की स्थापना

राजस्थान विधानसभा में rims और मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक पारित जयपुर में aiims की तर्ज पर rims की स्थापना

Rajasthan RIMS Bill: राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) विधेयक, 2025 और राजस्थान मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। RIMS विधेयक के पारित होने से जयपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली की तर्ज पर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह संस्थान राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के विलय के साथ एक स्वायत्त इकाई के रूप में कार्य करेगा। विधानसभा में इस बिल पर तीखी बहस हुई, जिसमें गवर्निंग काउंसिल और अन्य मुद्दों पर नोक-झोंक देखने को मिली। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही 9 सितंबर तक स्थगित कर दी गई।

[caption id="attachment_103961" align="alignnone" width="671"]राजस्थान विधानसभा में RIMS और मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक पारित राजस्थान विधानसभा में RIMS और मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक पारित[/caption]

5 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट का प्रावधान

RIMS को एक स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा, जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक मान्यताएं प्रदान करेगा। इसकी स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए इसका प्रशासनिक ढांचा स्वतंत्र होगा, जिसमें मुख्य सचिव को अध्यक्ष और एक निदेशक को संस्थान का प्रमुख नियुक्त किया जाएगा। राज्य सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह RUHS के किसी भी घटक कॉलेज को सरकारी कॉलेज घोषित कर सके, जिसके बाद उसका प्रशासनिक नियंत्रण और सभी संपत्तियां (जमीन, भवन, प्रयोगशालाएं) सरकार के पास होंगी। RIMS को 40 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा, और इसके लिए 100 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे और 5 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट का प्रावधान किया गया है। [caption id="attachment_103963" align="alignnone" width="664"]विथेयक हुआ पेश विथेयक हुआ पेश[/caption]

सुपर स्पेशलिटी सेवाएं

RIMS का उद्देश्य सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है। यह कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्रिनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, CTVS, और प्रत्यारोपण इकाइयों जैसी सेवाएं प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, नई सब-स्पेशलिटी जैसे पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, रीप्रोडक्टिव बायोलॉजी, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्लीप मेडिसिन और क्रिटिकल केयर शुरू की जाएंगी। यह संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा, जिससे राजस्थान में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

Rajasthan RIMS Bill: मुफ्त इलाज मिलेगा

RIMS के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए गए हैं। 100 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे के लिए और 5 करोड़ रुपये वार्षिक परिचालन खर्च के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकता है। प्रशासकीय रूप से, RIMS को एक स्वायत्त संस्था के रूप में संचालित करने के लिए एक समर्पित कोष स्थापित किया जाएगा। गवर्निंग काउंसिल में AIIMS दिल्ली, PGI चंडीगढ़, और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह काउंसिल नीति निर्माण और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करेगी। मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज मिलेगा, जिससे अन्य सरकारी अस्पतालों पर बोझ कम होगा।

विधानसभा में नोक-झोंक 

RIMS विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शांति धारीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार RUHS का केवल नाम बदलकर RIMS बना रही है और इसके लिए आवंटित 750 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं किया जा रहा। जवाब में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने तंज कसते हुए कहा कि धारीवाल को बेहतर स्मृति के लिए "च्यवनप्राश" लेना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि RIMS एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान के रूप में विकसित होगा। गवर्निंग काउंसिल के गठन पर भी सवाल उठे, जिसमें विपक्ष ने पारदर्शिता और विशेषज्ञों की नियुक्ति की मांग की। [caption id="attachment_103962" align="alignnone" width="547"]विधानसभा में इस बिल पर तीखी बहस हुई विधानसभा में इस बिल पर तीखी बहस हुई[/caption]

मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक

Rajasthan RIMS Bill: राजस्थान मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025 में अवैध मछली पकड़ने की सजा को बढ़ाया गया है। पहली बार अपराध के लिए जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये और दूसरी बार अपराध के लिए 1,000 रुपये से 50,000 रुपये किया गया है। स्वतंत्र विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने चेतावनी दी कि यह जुर्माना गरीब मछुआरों पर बोझ डाल सकता है, लेकिन विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।

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