ladakh violence: पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग, लेह में छात्रों का प्रदर्शन, भाजपा ऑफिस फूंका

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ladakh violence: पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग, लेह में छात्रों का प्रदर्शन, भाजपा ऑफिस फूंका

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लद्दाख में हिंसा: सोनम वांगचुक के समर्थन में उबाल ladakh-statehood-demand,sonam-wangchuk-protest,leh-students-violence,bjp-office-fire  

हमें राज्य चाहिए, और अब नहीं झुकेंगे!– लद्दाख के युवाओं की हुंकार सोनम वांगचुक के समर्थन में

ladakh violence: सिर्फ ठंड नहीं, लद्दाख अब आग बन गया है। जिस धरती पर शांत बौद्ध संस्कृति की मिसाल दी जाती है, आज वहां का युवा आग उगल रहा है। 15 दिन से भूखे बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और समाजसेवी सोनम वांगचुक की आवाज़ अब सैकड़ों युवाओं की गर्जना में बदल चुकी है। और यही आवाज़ बुधवार को हिंसक विद्रोह में तब्दील हो गई, जब लेह में छात्रों ने BJP ऑफिस और CRPF की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

 क्यों फूटा लद्दाख का ग़ुस्सा?

2019 में जब अनुच्छेद 370 हटा और लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब कहा गया था: जल्द ही स्थिति सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। लेकिन 6 साल बीत गए और लद्दाख के लोग आज भी अपनी राजनीतिक आवाज, जमीन और नौकरियों के लिए लड़ रहे हैं। सवाल बस एक है — 'हमारी पहचान कब लौटेगी?'

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल: गांधी की राह, लेकिन सरकार चुप

सोनम वांगचुक, वही नाम जिनकी जिंदगी पर '3 इडियट्स' का किरदार 'फुंसुख वांगड़ू' बना। आज वो एक टेंट में बैठकर 15 दिन से अन्न का त्याग कर चुके हैं। ना प्रचार, ना मंच – सिर्फ एक शांति की चीख़ लेकर, वो कह रहे हैं: लद्दाख को उसका हक़ दो। हमारी जमीनें कॉरपोरेट्स को मत दो। हमारे बच्चों को नौकरियों से वंचित मत करो। हमें संविधान के तहत संरक्षण दो। लेकिन दिल्ली अब तक खामोश है।

कैसे भड़की हिंसा? — 3 कड़ियों में समझिए

1. सोशल मीडिया से प्लानिंग

प्रदर्शन का ऐलान वांगचुक के समर्थन में हुआ। मंगलवार रात को सोशल मीडिया पर प्लान बन गया – कल हिल काउंसिल ऑफिस चलो।”

2. सुबह हज़ारों जुटे

लेह की सड़कों पर सुबह-सुबह हजारों छात्र और युवा जमा हो गए। हाथों में तख्तियां, गुस्से में नारे।

3. झड़प, आगजनी, पत्थरबाज़ी

CRPF और पुलिस ने बैरिकेडिंग की, लेकिन टकराव हुआ। आंसू गैस के गोले दागे गए। जवाब में छात्रों ने पत्थर चलाए। CRPF की गाड़ी को आग लगा दी गई। कुछ प्रदर्शनकारी भाजपा दफ्तर में घुस गए और उसे फूंक दिया।

छात्र क्या कह रहे हैं?

हमसे हमारी ज़मीन छीनी जा रही है। बाहर के लोगों को बसाया जा रहा है। नौकरी में हमें दरकिनार किया जा रहा है। ये सब विकास नहीं, हमारी पहचान की हत्या है।
ये आंदोलन सिर्फ भूख की नहीं, भविष्य की लड़ाई है। एक छात्रा, जो पत्थर चलाने वालों में नहीं थी, लेकिन आंखों में आंसू लिए खड़ी थी।

 लद्दाखियों की माँग क्या है?

  • पूर्ण राज्य का दर्जा
  • छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा, ताकि ज़मीन, रोज़गार और संस्कृति की रक्षा हो सके
  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सत्ता में भागीदारी
  • भर्ती में प्राथमिकता, बाहरी हस्तक्षेप पर रोक

 क्या सरकार ने कुछ किया है?

2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख में 5 नए जिलों की घोषणा जरूर की थी – जांस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग। लेकिन जमीनी लोग पूछते हैंजिले बढ़ाने से लोकतंत्र नहीं आता, हमें अधिकार चाहिए।

सोनम वांगचुक बोले – ये GenZ रेवोल्यूशन है”

वांगचुक ने कहा:

मैंने कभी हिंसा नहीं सिखाई। लेकिन जब सरकारें युवाओं की शांत आवाज़ नहीं सुनतीं, तो गुस्सा फूटता है। ये जनरेशन Z का रेवोल्यूशन है पढ़ी-लिखी, जागरूक, और अब चुप नहीं बैठेगी।
वांगचुक ने अनशन तोड़ा, युवाओं से अपील- हिंसा रोकें

हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने कहा, यह लद्दाख के लिए दुख का दिन है। हम पांच साल से शांति के रास्ते पर चल रहे थे। अनशन किया, लेह से दिल्ली तक पैदल चलकर गए। आज हम शांति के पैगाम को असफल होते हुए देख रहे हैं।

https://nationmirror.com/indian-army-permanent-commission-women-discrimination-supreme-court/

हमने हर मोर्चे पर साथ दिया, पर सेना ने हमें बराबरी नहीं दी!

Indian Army Women Permanent Commission case: सेना सिर्फ एक नौकरी नहीं, जीवन है। और जब इस जीवन में आप पूरी शिद्दत से सब कुछ झोंक दें – युद्ध, सीमा, और बलिदान – तो बदले में आपको बराबरी मिलनी चाहिए। ये कोई भावुक बयान नहीं,,,,,,
   

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