धार्मिक मान्यताओं में कैलाश मानसरोवर का स्थान...
कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना गया है। यह स्थल न केवल हिंदू, बल्कि बौद्ध, जैन और बोन् (तिब्बती) परंपराओं में भी पवित्र और पूजनीय माना जाता है। 1. हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत वह स्थान है जहां भगवान शिव ध्यान में लीन रहते हैं। 2. जैन धर्म में इसे ऋषभदेव (प्रथम तीर्थंकर) की मोक्ष स्थली माना जाता है। 3. बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे ‘कांग रिंपोछे’ (बर्फ का रत्न) कहते हैं। 4. बोन् धर्म के अनुयायी इसे ब्रह्मांड का केंद्र मानते हैं।
मानसरोवर झील: आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत...
कैलाश पर्वत के समीप स्थित मानसरोवर झील को भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस झील का जल स्वयं ब्रह्मा द्वारा निर्मित है। यहां स्नान करने और जल पीने से व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं और आत्मा को शुद्धि प्राप्त होती है। यह झील पूर्णिमा के दिन अत्यधिक चमकती है और इसमें कई बार रहस्यमयी प्रकाश व धार्मिक आकृतियां दिखने के दावे भी किए जाते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक अभी तक स्पष्ट रूप से नहीं समझा सके हैं।सूत्रो के अनुसार, पंजीकरण प्रक्रिया और पात्रता...
1. पंजीकरण की अंतिम तिथि थी: 13 मई 2025 2. उम्र सीमा: 18 से 70 वर्ष के बीच 3. स्वास्थ्य परीक्षण: ऊँचाई और थकावट के लिहाज से फिटनेस अनिवार्य 4. दस्तावेज: पासपोर्ट अनिवार्य, मेडिकल सर्टिफिकेट और बीमा यात्रा के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होता है।
यात्रा की योजना और बैच डिटेल...
इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा 30 जून 2025 से शुरू होकर अगस्त 2025 तक चलेगी। यात्रा के लिए कुल 15 बैच निर्धारित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक बैच में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। इन बैचों को दो मार्गों से रवाना किया जाएगा। उत्तराखंड मार्ग के तहत 5 बैच पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी और लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरेंगे, जबकि सिक्किम मार्ग के तहत 10 बैच गंगटोक से नाथुला दर्रा पार करते हुए तिब्बत सीमा में प्रवेश करेंगे। सभी यात्रियों को सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रशिक्षित गाइड्स की सुविधा प्रदान की जाएगी, ताकि यात्रा सुगम और सुरक्षित रूप से सम्पन्न हो सके।कोविड और सीमा विवाद के कारण रुकी थी यात्रा...
2019 में अंतिम बार कैलाश मानसरोवर यात्रा सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई थी। इसके बाद कोविड-19 महामारी के प्रकोप और फिर 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के कारण यह यात्रा स्थगित कर दी गई थी। दोनों देशों के बीच सीमा तनाव के चलते कई वर्षों तक तीर्थयात्रियों को अनुमति नहीं दी गई। अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं, यात्रा को दोबारा शुरू किया गया है।कठिन यात्रा, पर आध्यात्मिक शांति अपार...
कैलाश मानसरोवर यात्रा को सबसे कठिन और जोखिमभरी यात्राओं में से एक माना जाता है। इसमें पर्वतीय इलाके, ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, कड़कड़ाती ठंड और लंबी ट्रेकिंग शामिल होती है। बावजूद इसके, श्रद्धालु इसे भगवान से सीधा जुड़ाव मानते हैं और इसमें शामिल होकर अपने जीवन को धन्य समझते हैं।