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भारत ने रचा इतिहास: निजी क्षेत्र को मिली परमाणु ऊर्जा की चाबी, 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य! 

By : Shital Sharma
भारत ने रचा इतिहास: निजी क्षेत्र को मिली परमाणु ऊर्जा की चाबी, 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य! 

Atomic Energy Bill: क्या आपने कभी सोचा था कि भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र भी निजी हाथों में जा सकता है ? गुरुवार को संसद ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए परमाणु ऊर्जा विधेयक को मंजूरी दे दी. अब निजी और विदेशी कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश कर सकेंगी । देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह कदम एक बड़ा बदलाव है, जो अब तक सरकारी नियंत्रण में था।

Atomic Energy Bill: क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?

भारत आज ऊर्जा की भारी कमी से जूझ रहा है. 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।   अब तक सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया देश के सभी 8.8 गीगावाट परमाणु संयंत्रों का संचालन करती थी . लेकिन अब निजी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में कदम रखने का मौका मिलेगा।

कौन-कौन से दिग्गज कंपनियां हो सकती हैं शामिल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा पावर, अदानी पावर, और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश करने की तैयारी में हैं । अनुमान है कि लगभग 26 अरब डॉलर का निवेश इस क्षेत्र में आएगा. नए कानून के तहत  निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्र चलाने के लिए लाइसेंस लेना होगा  विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकेंगी।

क्या होगा आम आदमी पर असर?

इस फैसले से देश में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे बिजली की कमी और महंगाई पर काबू पाना आसान हो सकता है।  लेकिन सवाल यह भी है कि निजी कंपनियों के प्रवेश से बिजली के दाम पर क्या असर पड़ेगा ? विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवा बेहतर हो सकती है लेकिन कीमतों पर नजर रखने की जरूरत होगी।

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