Female Journalist Abuse: मध्य प्रदेश में महिला सम्मान और प्रशासनिक मर्यादाओं को लेकर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। जहां एक ओर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर घिरे हुए हैं, वहीं अब उनके ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कमिश्नर श्रीमन शुक्ला पर एक महिला पत्रकार से अभद्र व्यवहार का गंभीर आरोप लगा है।
[caption id="attachment_81960" align="alignnone" width="300"]

Female Journalist Abuse[/caption]
Female Journalist Abuse: प्रदेश की सियासत में तूफान ला दिया
मंत्री विजय शाह की टिप्पणी ने प्रदेश की सियासत में तूफान ला दिया है। उन्होंने सेना में पदस्थ महिला अधिकारी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने न केवल उन्हें फटकार लगाई, बल्कि सख्त चेतावनी भी दी कि पार्टी लाइन से हटकर कोई भी बयानबाजी भविष्य में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस प्रकरण के बाद विजय शाह ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।
Female Journalist Abuse: कमिश्नर श्रीमन शुक्ला पर एक महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार का आरोप
लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। अब जनजातीय विभाग के कमिश्नर श्रीमन शुक्ला पर एक महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि जब पत्रकार जनहित के एक मुद्दे को लेकर जानकारी प्राप्त करने उनके कार्यालय पहुंची, तो कमिश्नर ने न केवल असहज व्यवहार किया, बल्कि अपशब्दों का प्रयोग करते हुए पत्रकार का अपमान भी किया। उन्होंने कहा, "जाकर मंत्री से बात करो, हमारे पास इतना टाइम नहीं है। जो छापना है छापो, मैं किसी से नहीं डरता।"
Female Journalist Abuse: मीडिया – पर सीधा प्रहार
यह व्यवहार न केवल प्रशासनिक गरिमा के खिलाफ है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ – मीडिया – पर सीधा प्रहार भी है। पत्रकारों का कार्य समाज में सूचना और जागरूकता फैलाना होता है, और उन्हें अपमानित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जाना चाहिए, खासकर जब यह मामला एक महिला पत्रकार से जुड़ा हो।
श्रीमन शुक्ला पूर्व मंत्री के पारिवारिक रिश्तेदार
Female Journalist Abuse: चौंकाने वाली बात यह है कि श्रीमन शुक्ला पूर्व मंत्री के पारिवारिक रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। उनके ससुर कभी प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर रह चुके हैं। क्या प्रशासनिक शक्ति का यह दुरुपयोग पारिवारिक रसूख के चलते है? यह सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है।