पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया, शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रदेश के पहले BJP मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। ब्रिगेड परेड ग्राउंड को इस भव्य समारोह के लिए विशेष रूप से सजाया गया। BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित यह शपथ ग्रहण समारोह राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।
PM के छुए पैर
सुवेंदु अधिकारी ने शपथ के बाद पीएम मोदी के पैर छुए। बंगाल के गवर्नर RN रवि ने सुवेंदु के अलावा 5 और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निषिथ प्रमाणिक का नाम शामिल है। इस दौरान PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, NDA और BJP शासित प्रदेशों के 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। PM मोदी ने मंच पर रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी 165वीं जयंती पर श्रद्धाजंलि दी।
98 साल के कार्यकर्ता का सम्मान
इसके बाद पीएम मोदी ने मंच पर BJP के 98 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर आते ही प्रधानमंत्री मोदी सीधे सरकार के पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और फिर उनके पैर छुए। इसके बाद सरकार ने प्रधानमंत्री को गले लगाए रखा।

BJP ने 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में 207 सीटें जीतकर 15 सालों से सत्ता में रही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव में सिमटकर केवल 80 सीटों पर रह गई है।
जीवन और परिवार
- जन्म: 15 दिसंबर 1970
- जन्मस्थान: कोंतली
- पिता: शिशिर अधिकारी
परिवार पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी प्रभावशाली माना जाता है, खासकर पूर्वी मिदनापुर इलाके में।
उन्होंने राजनीति विज्ञान में पढ़ाई की और छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। वे बचपन में इतने धार्मिक थे कि घरवालों को डर लगने लगा था कहीं वे संन्यासी न बन जाए। 80 के दशक के आखिर में कांथी के प्रभात कुमार कॉलेज से सुवेंदु अधिकारी की छात्र राजनीति शुरू हुई। धीरे-धीरे पूर्व मेदिनीपुर में अपनी अलग पहचान बना ली।
राजनीतिक करियर की शुरुआत
सुवेंदू अधिकारी ने 1990 के दशक में कांग्रेस का दामन थामा थे। लेकिन बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ राजनीति शुरू कर दी। जब ममता बनर्जी ने TMC बनाई, तब वे शुरुआती नेताओं में शामिल थे।
- 1998: TMC के गठन के बाद पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका
- 2004: कोंतली लोकसभा सीट से सांसद चुने गए
- 2009 और 2014 में भी सांसद बने
- उनकी छवि एक मजबूत जमीनी नेता की रही है।

नंदीग्राम आंदोलन से पहचान
सुवेंदू का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ Nandigram movement था। 2007 में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार द्वारा नंदीग्राम में इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध हुआ। इस आंदोलन में सुवेंदू अग्रणी चेहरों में से एक थे।
इस आंदोलन ने वामपंथी सरकार की लोकप्रियता को भारी नुकसान पहुंचाया। TMC को ग्रामीण बंगाल में मजबूत किया। सुवेंदू अधिकारी को राज्यव्यापी पहचान दिलाई। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नंदीग्राम आंदोलन ने 2011 में वाम मोर्चा सरकार के पतन की नींव रखी। 2011 में TMC की सरकार बनने के बाद सुवेंदू अधिकारी को कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं।
प्रमुख पद
- परिवहन मंत्री
- सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग
- बाद में कई प्रशासनिक समितियों की जिम्मेदारी
- वे संगठन और प्रशासन दोनों में प्रभावशाली नेता माने जाते थे।
TMC से मतभेद
2020 में TMC और सुवेंदू अधिकारी के बीच मतभेद बढ़ गए। उसका कारण था पार्टी में बढ़ती अंदरूनी राजनीति, नेतृत्व शैली को लेकर असहमति और संगठन में भूमिका कम होने की शिकायत। इसलिए दिसंबर 2020 में सुवेंदू अधिकारी ने TMC छोड़ दी और BJP में शामिल हो गए। 2021 का चुनाव सुवेंदू के राजनीतिक करियर का सबसे चर्चित अध्याय बना। उन्होंने Nandigram सीट से चुनाव लड़ा, जहां उनका मुकाबला सीधे ममता बनर्जी से हुआ। सुवेंदू ने ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में हरा दिया। हालांकि BJP राज्य में सरकार नहीं बना सकी। लेकिन इसके बाद अधिकारी विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए।