SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सीएम बनर्जी खुद बनीं वकील , नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

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SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सीएम बनर्जी खुद बनीं वकील , नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

sir पर सुप्रीम कोर्ट में सीएम बनर्जी खुद बनीं वकील  नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

mamata banerjee supreme court SIR: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन इस बार मामला सिर्फ कानूनी नहीं रहा। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के साथ अदालत पहुंचीं और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सीधे सवाल खड़े किए। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कोशिश हो रही है.सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि असली और योग्य लोगों का नाम चुनावी सूची में बना रहना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब भी मांगा है।

mamata banerjee supreme court SIR: बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर

ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि जो काम दो साल में होना था, उसे महज तीन महीने में पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि SIR की प्रक्रिया वोटर्स को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि नाम हटाने के लिए चलाई जा रही है। अब तक करीब 58 लाख नाम हटाए जा चुके हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।

mamata banerjee supreme court SIR: नाम मिसमैच पर नोटिस वापस लेने की मांग

मुख्यमंत्री ने दलील दी कि नाम मिसमैच के आधार पर जारी किए गए नोटिस वापस लिए जाने चाहिए। ममता का आरोप है कि माइक्रो ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति कर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के अधिकारों को दरकिनार किया गया है. उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का दबाव जमीनी स्तर तक दिखाई दे रहा है और चुनाव आयोग की प्रताड़ना के चलते 100 से ज्यादा लोगों की जान जाने की बात भी सामने आई है। Also Read-SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सीएम बनर्जी खुद बनीं वकील , नाम मिसमैच नोटिस वापस लेने की मांग

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि SIR के काम के लिए राज्य सरकार से कई बार पर्याप्त ग्रुप-बी अधिकारियों की मांग की गई, लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी वजह से माइक्रो ऑब्जर्वर्स नियुक्त करने पड़े। आयोग ने कहा कि सभी नोटिस कारण सहित जारी किए गए हैं और जिनके नाम हटाए गए, उन्हें अधिकृत एजेंट के जरिए भी अपनी बात रखने की अनुमति दी गई थी। आयोग का दावा है कि समय को लेकर कोई दबाव नहीं है और राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही, तो विकल्प सीमित हो जाते हैं। Also Read-Navgrah Temple Dabra: इस शहर में बना विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ, जानिए कब है प्राण प्रतिष्ठा!

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का पहला मौका

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका बताया जा रहा है, जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने खुद अदालत में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। आमतौर पर ऐसे मामलों में मुख्यमंत्रियों की ओर से वकील या कानूनी सलाहकार ही अदालत में मौजूद रहते हैं.अब निगाहें चुनाव आयोग और बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि SIR प्रक्रिया में आगे क्या बदलाव होते हैं।  

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