बारामती विमान हादसे की खबरों के बीच याद आया 2001 का दर्द, जब माधवराव सिंधिया का निधन हुआ

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बारामती विमान हादसे की खबरों के बीच याद आया 2001 का दर्द, जब माधवराव सिंधिया का निधन हुआ

बारामती विमान हादसे की खबरों के बीच याद आया 2001 का दर्द जब  माधवराव सिंधिया का निधन हुआ

 महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार को हुए कथित विमान हादसे की खबरों ने एक बार फिर देश को पुराने जख्मों की याद दिला दी। रिपोर्ट्स में कहा गया कि लैंडिंग से पहले विमान क्रैश हुआ और इसमें कई लोगों की जान चली गई। इन्हीं खबरों के बीच ग्वालियर में 30 सितंबर 2001 का वह दिन फिर चर्चा में आ गया, जब मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता और ग्वालियर राजघराने के महाराज माधवराव सिंधिया का निधन एक विमान हादसे में हो गया था।  

30 सितंबर 2001, जब आसमान से टूटा दुख

माधवराव सिंधिया 30 सितंबर 2001 को एक निजी विमान से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जा रहे थे। वहां उन्हें एक राजनीतिक रैली को संबोधित करना था। उनके साथ विमान में कुछ नेता, पत्रकार और दो पायलट भी मौजूद थे। लेकिन यूपी के भैंसरोली गांव के पास उनका सी-90 एयरक्राफ्ट अचानक क्रैश हो गया। हादसा इतना भीषण था कि विमान का एक हिस्सा जमीन में धंस गया और दूसरे हिस्से में आग लग गई। इस दुर्घटना में विमान सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी।

बारिश, मलबा और सन्नाटा

हादसे वाले दिन इलाके में बारिश हो रही थी। स्थानीय लोगों और पुलिस ने मिलकर मलबे से शवों को बाहर निकाला। हालात ऐसे थे कि पहचान कर पाना भी आसान नहीं था। माधवराव सिंधिया के शव की पहचान उनके गले में पहने मां दुर्गा के सोने के लॉकेट और जूतों से की गई। परिजनों के लिए यह पल बेहद पीड़ादायक था।

अटल बिहारी वाजपेयी भी हुए थे भावुक

हादसे की सूचना मिलते ही तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सक्रिय हो गए थे। सिंधिया परिवार से उनका गहरा लगाव था। कहा जाता है कि खबर सुनकर वे बेहद व्यथित हो गए थे। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी खुद भी अंतिम संस्कार में शामिल होने ग्वालियर पहुंचे थे।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

माधवराव सिंधिया की अंतिम यात्रा ग्वालियर के इतिहास की सबसे बड़ी भीड़ में से एक मानी जाती है। लोगों का हुजूम ऐसा था कि शहर के होटल भर गए, कई जगह लोगों के ठहरने तक की व्यवस्था नहीं बची थी। सीनियर पत्रकार के मुताबिक, “महाराज के निधन के बाद ग्वालियर अपने आप बंद हो गया था। करीब सात दिन तक शहर में सन्नाटा पसरा रहा। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला।”

150 सांसद, पूरा राजनीतिक जगत मौजूद

अंतिम संस्कार में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समेत करीब 150 सांसद शामिल हुए थे। सत्ता और विपक्ष, दोनों ओर के नेता पहुंचे थे। यह दिखाता है कि माधवराव सिंधिया का कद राजनीति में कितना बड़ा था।

जनसंघ से कांग्रेस तक का सफर

माधवराव सिंधिया ने राजनीति की शुरुआत जनसंघ से की थी और पहली बार उसी के टिकट पर ग्वालियर से सांसद बने। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए। वे राजमाता विजयाराजे सिंधिया के पुत्र और ग्वालियर रियासत के महाराज थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीति में आए। कांग्रेस से शुरुआत करने वाले ज्योतिरादित्य आज बीजेपी में हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

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