नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का बुधवार को 33वां दिन है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने अब तक 10 एफआईआर दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों पर हमला, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
वहीं, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
संसद मार्च हिंसा में 10 एफआईआर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें संसद मार्ग थाने में 4 एफआईआर ,कनॉट प्लेस थाने में 3 एफआईआर,मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड और कर्तव्य पथ थाने में 1-1 एफआईआर एफआईआर में प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर हमला, पथराव, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
जंतर-मंतर पर 33वें दिन भी जारी प्रदर्शन
बुधवार सुबह से जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जो 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई में घायल हुए थे। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार धरने पर डटे हुए हैं।
वांगचुक से नड्डा और जितेंद्र सिंह की मुलाकात का दावा
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। हालांकि, सरकार या संबंधित नेताओं की ओर से इस मुलाकात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट बुधवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा, जिसमें जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 जुलाई को पुलिस ने जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया, कई लोगों को हिरासत में लिया और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक को केवल स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल ले जाया गया था। याचिका में यह भी मांग की गई है कि अदालत की सुनवाई पूरी होने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई जबरन कार्रवाई या उत्पीड़न न किया जाए।
जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी
संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच जारी है। दिल्ली पुलिस दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की जांच कर रही है, जबकि हाईकोर्ट में पुलिस कार्रवाई की वैधता को लेकर सुनवाई से इस पूरे मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।