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रूसी सेना की डरावनी सच्चाई: हरियाणा के युवक के बयान ने सबको चौंका दिया!

By : Shital Sharma
रूसी सेना की डरावनी सच्चाई: हरियाणा के युवक के बयान ने सबको चौंका दिया!

क्या रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीयों को मौत के मुंह में भेजा जा रहा है?

Russia–Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को एक ऐसे संघर्ष से रूबरू करवा दिया है, जिसकी परिणति न केवल देशों के बीच बल्कि निर्दोष लोगों की जिंदगी में भी खौ़फ और दर्द का कारण बन रही है। इस युद्ध में एक और दिल दहला देने वाली सच्चाई सामने आई है, जो भारतीय युवाओं को रूस की सेना में भर्ती करने और उन्हें यूक्रेन की जंग में धकेलने की है।  russian army recruitment network indian youth haryana हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कुछ युवक, जिनमें अंकित जांगड़ा और विजय पुनिया जैसे नाम शामिल हैं, रूस में पढ़ाई और नौकरी की तलाश में गए थे। लेकिन जब उन्हें बिना किसी चेतावनी के रूस की सेना में भर्ती कर लिया गया और फिर यूक्रेन के जंग के मैदान में भेज दिया गया, तो उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया।

Russia–Ukraine War: रूस की भर्ती नेटवर्क और युवाओं की टूटती उम्मीदें

रूस में भारतीयों को भर्ती करने के लिए एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो लालच और धन का प्रलोभन देकर उन्हें अपनी चपेट में लेता है। रूस में फंसे युवा बताते हैं कि उन्हें सिर्फ 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें उन्हें मशीन गन चलाने और युद्ध के तरीके सिखाए जाते हैं। इसके बाद उन्हें सीधे यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में भेज दिया जाता है, जहां उनकी जिंदगी और मौत के बीच कोई फर्क नहीं रह जाता।

रमेश कुमार,

जो एक समय रूस में थे और अब भारत लौट आए हैं, बताते हैं कि..

यह नेटवर्क केवल भारत ही नहीं, बल्कि श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान जैसे देशों के युवाओं को भी फंसाता है। ये लोग वहां स्टडी वीजा या नौकरी के नाम पर जाते हैं, और फिर फौज में भर्ती हो जाते हैं।
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रमेश ने अपनी कहानी में कहा,,,,

"हमारे सामने बस दो रास्ते थे मरो या फिर सामने वाले को मारो।" यह किसी भी इंसान के लिए असहनीय स्थिति होती है, खासकर जब उस युवक को बिना किसी तैयारी के युद्ध में भेजा जाता है।

कुम्हारिया गांव के अंकित और विजय की दिल दहला देने वाली कहानी

अंकित जांगड़ा और विजय पुनिया का भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ। इन दोनों युवकों को रूस और यूक्रेन की सीमा से 15-20 किलोमीटर दूर जीरो लाइन पर तैनात किया गया है, जहां से वापसी की कोई राह नहीं। उनके परिवारवालों का कहना है कि इस क्षेत्र में जो भी जवान गए थे, वे कभी वापस नहीं लौटे। अंकित की मां और विजय की मां इन बच्चों की वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। अंकित की मां वीडियो कॉल पर कह रही हैं, "हम तुम्हें बचा लेंगे बेटा, चिंता मत करना। तुम अकेले नहीं हो, हम सब तुम्हारे साथ हैं।" यह एक मां का दर्द है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

क्या इस भर्ती नेटवर्क को रोक पाना संभव है?

Russia–Ukraine War: रूस का यह भर्ती नेटवर्क इतना मजबूत और प्रभावशाली है कि अंक्तिक और विजय जैसे तमाम भारतीय युवा, जिनका मुख्य उद्देश्य एक बेहतर भविष्य था, आज युद्ध की आग में जल रहे हैं। इस नेटवर्क से श्रीलंका, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों के युवा भी फंसे हुए हैं। इन युवाओं को आकर्षित करने के लिए रूस के सैन्य अधिकारियों द्वारा बड़ी रकम और आलिशान जिंदगी का वादा किया जाता है, जिससे ये लोग बेरोज़गार या संघर्षरत स्थिति में अपने घर छोड़कर रूस चले जाते हैं। लेकिन क्या इन देशों की सरकारें, भारत सहित, इस नेटवर्क को रोकने के लिए कोई कदम उठा सकती हैं?

परिवारों की उम्मीद और सरकार की जिम्मेदारी

अंकित और विजय के परिवार के लोग विदेश मंत्रालय और सीएम ऑफिस में अपनी उम्मीदें लेकर जाते हैं, ताकि उनके बच्चों की सुरक्षित वापसी हो सके। यह देखना बाकी है कि सरकारें इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करती हैं। क्या सरकार इस नेटवर्क पर कड़ी नज़र रखेगी? क्या अन्य देशों की सरकारें इस खतरे को समझने की कोशिश करेंगी?
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रूस के युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय युवा

अंकित और विजय जैसे कई युवक इस समय युद्ध के उस खौ़फनाक मैदान में फंसे हुए हैं, जहां से वापसी की कोई गारंटी नहीं। इन युवाओं की शक्ति, साहस, और दर्द को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या हमारी सरकारें इनसे जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए कदम उठाएंगी? क्या किसी भी युद्ध में मनुष्य का जीवन इस कदर सस्ता हो गया है?
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