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सिर्फ 3 मिनट में इनकम टैक्स कानून पास: संसद में बिना चर्चा के 8 बिल मंजूर

By : Shital Sharma
सिर्फ 3 मिनट में इनकम टैक्स कानून पास: संसद में बिना चर्चा के 8 बिल मंजूर

 मानसून सत्र 2025 संसद में हंगामा और लोकतंत्र पर सवाल

जब संसद में बहस नहीं, बस बिल पास हुआ तीनों मिनट... बस तीन मिनट में एक पूरा इनकम टैक्स कानून पास हो गया। ना चर्चा, ना सवाल, ना तर्क और यह केवल एक बिल की बात नहीं है। 11 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के 17वें दिन, कुल 8 बिल बिना बहस के पास हुए। लोकसभा हो या राज्यसभा, माहौल बहस का नहीं, हंगामे का था।

बिना बहस के पास हुए प्रमुख बिल

लोकसभा में:

  • नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल
  • नेशनल एंटी-डोपिंग (अमेंडमेंट) बिल
  • इनकम टैक्स (नंबर 2) बिल 2025 (सिर्फ 3 मिनट में पास!)
  • टैक्सेशन लॉ (अमेंडमेंट) बिल

राज्यसभा में:

  • गोवा विधानसभा एसटी रिजर्वेशन बिल
  • मर्चेंट शिपिंग बिल
  • मणिपुर विनियोग बिल
  • मणिपुर जीएसटी संशोधन बिल
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क्या है नया इनकम टैक्स बिल?  

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल में 285 संशोधन किए, और यह 3 मिनट में ध्वनि मत से पास हुआ। रिफंड का दावा अब बिना ITR फाइल किए भी संभव। ‘असेसमेंट वर्ष’ और ‘पिछले वर्ष’ की जगह अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ होगा। किराए की प्रॉपर्टी पर ब्याज छूट की परिभाषा स्पष्ट। जीरो TDS सर्टिफिकेट दोबारा लागू। शेयर मार्केट लॉस को आगे एडजस्ट किया जा सकेगा। धर्म, शिक्षा, चिकित्सा वाले कार्य टैक्स फ्री।

विपक्ष का विरोध- वोटर वेरिफिकेशन पर सवाल

संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया हालांकि कुछ ही घंटों में छोड़ दिया गया। मुद्दा है बिहार SIR डेटा और वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ का आरोप।

मानसून सत्र का आंकड़ा क्या कहता है?

32 दिन का सत्र तय है (21 जुलाई 21 अगस्त) 18 बैठकें, 15+ बिल, लेकिन...अब तक केवल 2 दिन (28 और 29 जुलाई) ही पूरे दिन सदन चला। बाकी दिनों में लगातार हंगामा। monsoon session 2025 lok sabha adjourned due to opposition uproar

लोकतंत्र पर बड़ा सवाल...

राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीधा सवाल उठाया:
“चर्चा के लिए कहा जाता है कि हाउस ऑर्डर में नहीं है... और बिल पास हो रहे हैं। क्या यही लोकतंत्र है?”
क्या संसद अब कानून बनाने की जगह लॉजिस्टिक मंजूरी केंद्र बन गई है?

 लोकतंत्र की मजबूती या कमजोरी?

सिर्फ बिल पास करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए, चर्चा, बहस और जवाबदेही लोकतंत्र की आत्मा है। जिन बिलों पर जनता की ज़िंदगी निर्भर करती है, उन्हें सिर्फ 3 मिनट में पास कर देना खतरे की घंटी नहीं तो क्या है? Read More:- पाकिस्तान की नई साजिश: गैस, पानी बंद कर भारतीय डिप्लोमैट्स पर दबाव

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