हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शुक्रवार को परोसे जाने वाले घेवर की गुणवत्ता को लेकर उस समय हड़कंप मच गया, जब जांच के दौरान मिठाई के डिब्बे पर न तो निर्माण तिथि दर्ज मिली और न ही उसकी वैधता से जुड़ी कोई जानकारी। मुख्यमंत्री की टीम में शामिल एक अधिकारी ने समय रहते घेवर को परोसने से रोक दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और प्रदेश के कई जिलों में मिठाई की दुकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई।
घेवर
बताया गया कि घेवर का डिब्बा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उनकी पत्नी सुमन सैनी और अन्य लोगों के सामने परोसा जाना था। हालांकि, सीएम की टीम के एक अधिकारी ने डिब्बे की जांच की तो उस पर जरूरी जानकारी दर्ज नहीं मिली। अधिकारी ने जब मिठाई तैयार करने वाले से इसकी वैधता के बारे में पूछा तो उसने बताया कि घेवर दो से चार घंटे तक ही शुद्ध रहता है। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और जांच के निर्देश दिए।
मथुरा जाते समय होडल में रुके थे CM
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को अपनी पत्नी सुमन सैनी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता और अन्य लोगों के साथ मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए रवाना हुए थे। कार्यक्रम के तहत उन्हें पलवल जिले के होडल स्थित डबचिक पर्यटन स्थल पर रुककर नाश्ता करना था। यहां मीडिया से बातचीत का कार्यक्रम भी निर्धारित था।
नाश्ते के मेन्यु में घेवर भी शामिल था। लेकिन परोसे जाने से कुछ ही समय पहले मुख्यमंत्री की टीम के एक अधिकारी ने घेवर के डिब्बे की जांच की। डिब्बे पर उत्पादन और वैधता की तारीख दर्ज नहीं थी, जबकि यह जानकारी अनिवार्य बताई गई है। लिहाजा घेवर को मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद लोगों के सामने परोसने से रोक दिया गया।
हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी
कई जिलों में छापेमारी, 500 से ज्यादा सैंपल
घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने कई जिलों में मिठाई की दुकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी। गुरुग्राम, पलवल, फरीदाबाद और सोनीपत समेत कई जिलों में पिछले दो दिनों के दौरान छापेमारी की गई और 500 से अधिक मिठाइयों के सैंपल लिए गए।
कार्रवाई के बीच बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि सैंपल की जांच रिपोर्ट आने तक सावन के त्योहार निकल जाएंगे और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घेवर समेत अन्य मिठाइयों का सेवन कर चुके होंगे। ऐसे में सवाल है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और आम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदार विभाग समय रहते निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?

मिठाई की दुकानों से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाजार में बिक रही मिठाइयां निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर कितनी खरी उतरती हैं।