CNG Price Hike in Delhi-NCR

दिल्ली-NCR में CNG ₹3.89 महंगी, इस साल 5वीं बार बढ़े दाम

CNG prices in Delhi-NCR have risen by ₹3.89 per kg, marking the fifth increase this year, affecting daily commuters and vehicle owners.

दिल्ली-NCR में CNG ₹3.89 महंगी, इस साल 5वीं बार बढ़े दाम

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमत शनिवार सुबह 6 बजे से लागू होगी। इसके बाद दिल्ली में CNG की कीमत ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो जाएगी। यानी वाहन चालकों को हर किलो CNG पर पहले के मुकाबले करीब ₹4 ज्यादा खर्च करने होंगे। इस साल CNG की कीमत में यह पांचवीं बढ़ोतरी है।

CNG की कीमत बढ़ने का सीधा असर दिल्ली-NCR में रोजाना सफर करने वाले लोगों पर पड़ सकता है। खासकर ऑटो, टैक्सी, बस और CNG से चलने वाले निजी वाहनों के मालिकों का मासिक ईंधन खर्च बढ़ सकता है। लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG को किफायती ईंधन माना जाता रहा है, लेकिन लगातार कीमत बढ़ने से इसकी बचत का अंतर कम हो सकता है।

IGL के अनुसार, CNG की कीमत में बढ़ोतरी के पीछे LNG की बढ़ती आयात लागत, अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में तेजी और घरेलू स्तर पर CNG की बढ़ती मांग प्रमुख कारण हैं। कंपनी का कहना है कि इनपुट गैस की लागत बढ़ने के कारण कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया था।

इससे पहले मई में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी आई थी। उस दौरान IGL ने केवल 10 दिनों के भीतर चार चरणों में CNG की कीमत कुल ₹6 प्रति किलो बढ़ाई थी। अब एक बार फिर ₹3.89 की बढ़ोतरी से दिल्ली-NCR के वाहन चालकों का बजट प्रभावित होने की संभावना है।

नोएडा-गाजियाबाद में ₹95.59, गुरुग्राम में ₹92.01 प्रति किलो

नई कीमत लागू होने के बाद दिल्ली के साथ-साथ आसपास के शहरों में भी CNG महंगी हो गई है। नोएडा और गाजियाबाद में CNG की कीमत बढ़कर ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। वहीं मेरठ में CNG का नया दाम ₹95.47 प्रति किलो और गुरुग्राम में ₹92.01 प्रति किलो हो गया है। इस तरह दिल्ली की तुलना में NCR के कई शहरों में CNG पहले से ही काफी महंगी है।

CNG की कीमतों में राज्यों और शहरों के हिसाब से अंतर होना आम बात है। पेट्रोल और डीजल की तरह CNG पर भी अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट की दरें लागू होती हैं। इसके अलावा गैस की सप्लाई, परिवहन और वितरण लागत भी अलग-अलग क्षेत्रों में कीमत को प्रभावित करती है। यही वजह है कि एक ही समय पर अलग-अलग शहरों में CNG के अलग-अलग दाम देखने को मिलते हैं।

दिल्ली-NCR में बड़ी संख्या में लोग रोजाना ऑटो, टैक्सी, कैब और निजी वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में CNG की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहता। अगर ड्राइवरों का ईंधन खर्च बढ़ता है, तो भविष्य में इसका असर यात्री किराए पर भी पड़ सकता है।

ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए ईंधन खर्च रोजाना के संचालन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। CNG की कीमत में लगभग ₹4 प्रति किलो की बढ़ोतरी लंबे समय में उनके कुल खर्च को बढ़ा सकती है। वहीं जिन लोगों का रोजाना लंबा सफर होता है, उनके मासिक बजट पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।

हालांकि IGL का कहना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद CNG दूसरे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अभी भी उपभोक्ताओं के लिए किफायती विकल्प बनी हुई है। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की बढ़ती लागत को कीमत संशोधन का प्रमुख कारण बताया है।

होर्मुज संकट से LNG सप्लाई और कीमत पर बढ़ा दबाव

CNG की कीमत में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार की स्थिति को भी महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। IGL के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़े संकट का असर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए LNG की सप्लाई और माल ढुलाई पर पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह का तनाव या व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

कंपनी के मुताबिक, संकट शुरू होने से पहले की तुलना में वैश्विक LNG कीमतें करीब दोगुनी हो चुकी हैं। LNG यानी Liquefied Natural Gas भारत के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है और जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़ती है, तो आयातित गैस की लागत भी बढ़ जाती है।

यूरोप में सर्दियों से पहले गैस भंडारण बढ़ाने की जरूरत ने भी वैश्विक बाजार में गैस की मांग बढ़ा दी है। यूरोपीय देशों की ओर से गैस भंडार भरने की कोशिशों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर उन देशों पर भी पड़ता है जो LNG का आयात करते हैं।

भारत में प्राकृतिक गैस की जरूरत का एक हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा होता है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण आयात पर निर्भरता भी बढ़ रही है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG महंगी होती है, तो आयातित गैस की लागत बढ़ जाती है। यही बढ़ी हुई लागत गैस वितरण कंपनियों के लिए चुनौती बनती है।

IGL ने इसी बढ़ती इनपुट लागत को CNG कीमत बढ़ाने की प्रमुख वजहों में शामिल किया है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू मांग के बीच लागत का दबाव बढ़ रहा है।

अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और LNG की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची रहती हैं, तो भारत में आयातित गैस की लागत पर भी दबाव बना रह सकता है। इसका असर आगे CNG के अलावा उद्योगों और अन्य गैस उपभोक्ताओं पर भी देखने को मिल सकता है।

CNG की बढ़ती मांग से आयात पर निर्भरता बढ़ी

भारत में पिछले कुछ वर्षों में CNG वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। प्रदूषण कम करने और पेट्रोल-डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत किफायती ईंधन के कारण बड़ी संख्या में लोग CNG वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली-NCR में तो CNG आधारित ऑटो, टैक्सी, बस और कमर्शियल वाहनों की संख्या काफी अधिक है। इसके चलते CNG की मांग लगातार बढ़ रही है।

IGL के अनुसार, बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इनपुट गैस का बड़ा हिस्सा आयातित स्पॉट LNG से पूरा किया जा रहा है। स्पॉट LNG की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की तत्काल मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है। ऐसे में जब वैश्विक बाजार में गैस महंगी होती है, तो भारतीय कंपनियों की खरीद लागत भी बढ़ जाती है।

वर्तमान स्थिति में दो तरफ से दबाव बन रहा है। एक तरफ भारत में CNG की मांग बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी है। इन दोनों कारणों से IGL की इनपुट गैस लागत बढ़ी है। कंपनी ने इसी अतिरिक्त लागत का एक हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालते हुए CNG की कीमत ₹3.89 प्रति किलो बढ़ाई है।

CNG की मांग बढ़ने के पीछे परिवहन क्षेत्र की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। शहरों में सार्वजनिक परिवहन, ऑटो और टैक्सी के अलावा बड़ी संख्या में निजी वाहन भी CNG पर चल रहे हैं। इसके चलते गैस की खपत बढ़ती जा रही है।

अगर CNG वाहनों की संख्या और मांग आगे भी बढ़ती है, तो घरेलू गैस उपलब्धता और आयातित LNG के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची रहने की स्थिति में कंपनियों की लागत और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला दबाव भी बढ़ सकता है।

हालांकि CNG अभी भी कई उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की तुलना में आकर्षक विकल्प बनी हुई है। लेकिन लगातार कीमतों में बढ़ोतरी से वाहन मालिकों की बचत धीरे-धीरे कम हो सकती है।

ऑटो-टैक्सी और माल ढुलाई पर पड़ सकता है सीधा असर

CNG की कीमत बढ़ने का सबसे सीधा असर कमर्शियल वाहनों के संचालन खर्च पर पड़ सकता है। दिल्ली-NCR में हजारों ऑटो, टैक्सी, कैब, बस और माल ढोने वाले वाहन CNG से चलते हैं। इन वाहनों के लिए रोजाना बड़ी मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है। ऐसे में प्रति किलो लगभग ₹4 की बढ़ोतरी लंबे समय में काफी बड़ा अतिरिक्त खर्च बन सकती है।

ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए ईंधन खर्च सीधे उनकी रोजाना कमाई से जुड़ा होता है। यदि CNG महंगी होती है तो ड्राइवरों के पास दो विकल्प होते हैं—या तो बढ़ा हुआ खर्च खुद वहन करें या फिर किराए में बढ़ोतरी की मांग करें। यदि लंबे समय तक ईंधन की कीमत ऊंची रहती है तो यात्रियों से लिए जाने वाले किराए पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इसी तरह माल ढुलाई करने वाले CNG वाहनों के संचालन खर्च में भी बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट कंपनियों और छोटे व्यापारियों के लिए ईंधन लागत कुल परिचालन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। अगर यह लागत बढ़ती है तो माल पहुंचाने की लागत भी बढ़ सकती है।

इसका अप्रत्यक्ष असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि केवल CNG की कीमत बढ़ने से महंगाई कितनी बढ़ेगी, यह अन्य कई कारकों पर निर्भर करेगा। लेकिन जिन कारोबारों में परिवहन लागत अधिक होती है, वहां अतिरिक्त ईंधन खर्च का असर दिखाई दे सकता है।

निजी वाहन मालिकों के लिए भी यह बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है। जो लोग रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं, उनके मासिक ईंधन बजट में बढ़ोतरी होगी। खासकर दिल्ली-NCR जैसे बड़े महानगरीय क्षेत्र में रोजाना ऑफिस, कारोबार या अन्य कामों के लिए लंबी दूरी तय करने वालों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।

CNG को लंबे समय से कम लागत वाले ईंधन के तौर पर देखा जाता रहा है। लेकिन इस साल लगातार पांच बार कीमत बढ़ने से वाहन मालिकों के सामने ईंधन खर्च का दबाव बढ़ा है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार में कीमतें आगे किस दिशा में जाती हैं।

एशिया में LNG की कीमत दोगुने से ज्यादा, वैश्विक बाजार में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में हुई तेजी का असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ रहा है। एशिया में LNG के लिए JKM यानी Japan Korea Marker एक प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है। इस बेंचमार्क में इस साल फरवरी से अगस्त के बीच बड़ा उछाल देखने को मिला।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में JKM की कीमत करीब 11 डॉलर प्रति MMBTU थी। अगस्त तक यह बढ़कर करीब 23.4 डॉलर प्रति MMBTU हो गई। यानी कुछ ही महीनों में कीमत दोगुने से भी ज्यादा स्तर पर पहुंच गई। LNG की इतनी तेज बढ़ोतरी से एशियाई देशों के लिए गैस आयात की लागत पर सीधा दबाव पड़ता है।

यूरोप में भी प्राकृतिक गैस की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला। TTF गैस बेंचमार्क फरवरी में करीब 11.3 डॉलर प्रति MMBTU था, जो अगस्त में बढ़कर लगभग 23.3 डॉलर प्रति MMBTU हो गया। इस तरह यूरोप और एशिया दोनों प्रमुख बाजारों में गैस की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।

अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत तक पहुंचना स्वाभाविक है, क्योंकि घरेलू उत्पादन से पूरी मांग पूरी नहीं होती और कुछ गैस आयात करनी पड़ती है। जब आयातित LNG महंगी होती है, तो गैस कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ती है।

यही कारण है कि दिल्ली-NCR में CNG की कीमत बढ़ाने के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को भी प्रमुख वजह बताया गया है। आगे अगर वैश्विक LNG कीमतों में नरमी आती है तो गैस कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो CNG उपभोक्ताओं पर भी महंगे ईंधन का दबाव जारी रह सकता है।

इस पूरी स्थिति में पश्चिम एशिया का संकट, होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई, यूरोप की गैस मांग और एशियाई LNG बाजार की कीमतें भारत के CNG उपभोक्ताओं के लिए अहम कारक बन गए हैं।

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