तिब्बत में गुरुवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.0 मापी गई। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से लगभग 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताया गया है। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान या लोगों के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
कम गहराई पर आया भूकंप
इस भूकंप की खास बात इसकी कम गहराई है। जमीन के भीतर करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आने वाले भूकंप के झटके कई बार सतह पर ज्यादा महसूस हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि भूकंपीय ऊर्जा को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है। हालांकि, इस बार अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
पहले ही मच चुकी है भारी तबाही
तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है, जब नेपाल और तिब्बत हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। 26 अगस्त को दोनों क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन से कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
आपदा में 1273 लोगों की मौत
26 अगस्त की बाढ़ और भूस्खलन की घटना में अब तक कुल 1273 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1252 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया गया। कई प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित हुई थीं।
भूकंप के बाद बढ़ी चिंता
बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के कुछ ही दिनों बाद भूकंप के झटकों ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक किसी नए नुकसान की सूचना नहीं है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सबसे बड़ी राहत की बात यही है कि 5 तीव्रता के इस भूकंप के बाद किसी जनहानि की खबर सामने नहीं आई है।