रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को 405 स्ट्रैटेजिक आइटम्स की छठी लिस्ट जारी की है। इसमें फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, टैंक, बख्तरबंद वाहन, रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़े पार्ट्स, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट, सब-सिस्टम और रॉ मटेरियल शामिल हैं।
सरकार का लक्ष्य इन सामानों का निर्माण देश में ही बढ़ाना और रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है। मंत्रालय के मुताबिक, इन उत्पादों का घरेलू निर्माण होने से करीब ₹3,070 करोड़ के कारोबार की संभावना है।
फाइटर जेट और टैंक के पार्ट्स भी होंगे स्वदेशी
नई लिस्ट में हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमानों से जुड़े उपकरणों के साथ-साथ टैंक और बख्तरबंद वाहनों के पार्ट्स भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा रडार, सोनार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और टैंक रोधी गोला-बारूद से जुड़े सामान को भी भारतीय कंपनियों के जरिए तैयार करने पर जोर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर AL-31FP इंजन, जिसका इस्तेमाल सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान में होता है, जैसे रक्षा प्लेटफॉर्म से जुड़े उपकरणों के स्वदेशीकरण पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।
भारतीय कंपनियों और MSME को मिलेगा मौका
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी लिस्ट में प्रत्येक प्रोडक्ट के भारतीयकरण के लिए समयसीमा भी तय की गई है। इन उत्पादों के निर्माण में भारतीय उद्योगों के साथ MSME और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। मंत्रालय का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे। साथ ही देश का घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम मजबूत होगा और रक्षा क्षेत्र में निवेश एवं नई तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
5 साल में 15,700 से ज्यादा प्रोडक्ट्स
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2020 में SRIJAN डिफेंस पोर्टल शुरू किया गया था। इस पोर्टल के जरिए DPSUs और सर्विस हेडक्वार्टर रक्षा उत्पादों को भारतीय उद्योगों, MSME और स्टार्टअप्स के सामने देश में विकसित और निर्मित करने के लिए रखते हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पोर्टल शुरू होने से जून 2026 तक 33,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स भारतीय उद्योगों के सामने रखे जा चुके हैं। इनमें से पिछले पांच साल में 15,700 से ज्यादा प्रोडक्ट्स का भारतीयकरण किया गया है। इससे करीब ₹9,000 करोड़ के आयात की जगह घरेलू उत्पादन होने का अनुमान है।
₹10 हजार करोड़ के ऑर्डर
मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 तक घरेलू विक्रेताओं को करीब ₹10,000 करोड़ के खरीद ऑर्डर दिए जा चुके हैं। इनमें इन-हाउस प्रोडक्शन से जुड़े ऑर्डर भी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि 405 नए स्ट्रैटेजिक आइटम्स के भारतीयकरण से देश में रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी।
सेना के लिए ₹1,577 करोड़ के रक्षा सौदे
इससे पहले 14 अगस्त को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए करीब ₹1,577 करोड़ के दो कॉन्ट्रैक्ट किए थे। इनके तहत लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम, म्यूनिशन और अन्य रक्षा सामान खरीदे जाएंगे। नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए थे।