बारिश नहीं, आफत है ये! मुंबई की डूबी सड़कें, परेशान लोग

मुंबई में बारिश कोई नई बात नहीं। लेकिन इस बार जो हो रहा है, वो सिर्फ बारिश नहीं, एक आपदा है। बारिश की ये बौछारें अब राहत नहीं, शहर के लिए भारी मुसीबत बन चुकी हैं। मंगलवार की सुबह लोग जब नींद से उठे, तो कई घरों में पानी था literally! सड़कों पर ट्रैफिक की जगह नाव चलती तो बेहतर होता। रेलवे ट्रैक झील जैसे बन गए हैं, फ्लाइट्स आसमान में ही अटकी हैं, और दफ्तरों के दरवाज़े बंद। मुंबई के लोगों के लिए ये सिर्फ एक और “रेन डे” नहीं है ये संघर्ष का दिन है।
150mm से ज़्यादा बारिश, पूरे शहर की रफ्तार थमी
सुबह 4 बजे से 11 बजे तक औसतन 150mm से ज़्यादा बारिश हुई। बिक्रोली में तो 24 घंटे में 255mm बारिश दर्ज की गई। कुर्ला, अंधेरी, दादर, ठाणे, कल्याण कोई भी इलाका अछूता नहीं रहा। मीठी नदी का जलस्तर 3.9 मीटर बढ़ गया। कुर्ला क्रांति नगर में बाढ़ जैसे हालात बन गए और 350 से ज़्यादा लोगों को रेस्क्यू करना पड़ा।
लोकल ट्रेनें बंद, रेलवे ट्रैक डूबे
मुंबई की जान मानी जाने वाली लोकल ट्रेनें खुद ही बेहाल हैं। हार्बर लाइन पर रेलवे ट्रैक पूरी तरह डूब चुके हैं। कुछ यात्रियों को ट्रैक पर चलकर स्टेशन तक पहुंचना पड़ा। क्या आपने कभी ऐसा मंजर देखा है जहां ट्रेन रुक जाए और मुसाफिर बारिश से भीगते हुए रेलवे लाइन पर पैदल चलें? मुंबई में ‘टाइम मैनेजमेंट’ एक कल्चर है, लेकिन बारिश ने इस बार सब कुछ फ्लैट कर दिया है।
250 से ज्यादा फ्लाइट्स लेट, स्कूल कॉलेज ऑफिस बंद
बारिश की वजह से 250 से ज़्यादा फ्लाइट्स या तो लेट हुईं या डाइवर्ट करनी पड़ीं। BMC ने शहर में स्कूल, कॉलेज और सरकारी ऑफिस बंद रखने का आदेश दिया। अधूरी छुट्टी जैसी ये मजबूरी, बच्चों और ऑफिस वर्कर्स दोनों के लिए राहत नहीं बल्कि चिंता की वजह बन गई।

पानी घरों और दुकानों में, JCB और नावें तैनात
कुर्ला, वाशी, अंधेरी, मीरा रोड जैसे इलाकों में लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस आया है। JCB मशीनें सड़कों से पानी निकालने के लिए लाई गई हैं, लेकिन बारिश थमने का नाम नहीं ले रही। अंदर से लोग डरे हुए हैं, बाहर से बेहाल। शहर में मानो मानसून नहीं, मंथन हो रहा है।
हिमाचल से भी बुरी खबरें बादल फटा, सड़कें टूटी, पुल बहे
इधर मुंबई डूब रहा है, और उधर हिमाचल में बादल फटने से हालात बिगड़ चुके हैं। कुल्लू में रात 1 बजे ब्यास नदी उफान पर आ गई। दुकानें बह गईं, पुल बह गया। शिमला में भूस्खलन से 30 से ज्यादा परिवारों को हटाना पड़ा। बिजली, पानी और सड़क कनेक्टिविटी ठप हो चुकी है। लोगों ने बताया कि सड़क पर दरारें हफ्तों से दिख रही थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

कब तक यूं ही डूबता रहेगा देश?
बारिश रोक नहीं सकते, लेकिन तैयारी तो कर सकते हैं ना? मुंबई हर साल इसी तरह बाढ़ का शिकार होती है। नालों की सफाई, अर्बन प्लानिंग, और ड्रेनेज सिस्टम पर सालों से सिर्फ बातें हो रही हैं अमल ज़मीन पर कहीं नहीं। हर बार लोग सोशल मीडिया पर गुस्सा निकालते हैं, और सरकारें अगले साल के लिए वादे करती हैं। पर सवाल ये है: क्या 2025 में भी हमें बाढ़ से डरना पड़ेगा?
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