Reduce Screen Time In Children: पैरेंट्स की इन गलतियों की वजह से बच्चें चलाते हैं ज्यादा मोबाइल!

Reducing Screen Time for Kids

Reduce Screen Time In Children: पैरेंट्स की इन गलतियों की वजह से बच्चें चलाते हैं ज्यादा मोबाइल!

Amid rising concerns about excessive screen time, experts suggest engaging kids in outdoor activities and family time to naturally reduce screen attraction.

reduce screen time in children पैरेंट्स की इन गलतियों की वजह से बच्चें चलाते हैं ज्यादा मोबाइल

Reduce Screen Time In Children: पैरेंट्स की इन गलतियों की वजह से बच्चें चलाते हैं ज्यादा मोबाइल! |

Reduce Screen Time In Children: आजकल  हर घर में देखा होगा। बच्चे ज्यादातर मोबाइल चलाते हैं। वो खाना खा रहे होते हैं, तो मोबाइल देखते है।  कई बार जब बच्चों से माता - पिता कहते है। मोबाइल अब रख दो तो इस पर बच्चे कहते हैं, बस थोड़ी देर और। इस वजह से माता-पिता अपने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। मोबाइल, टैबलेट या टीवी से चिपके रहना आम समस्या बन गई है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, समस्या सिर्फ स्क्रीन नहीं है, बल्कि इसके पीछे बच्चों की कई अन्य जरूरतें छिपी होती हैं। अगर आप सच में स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं, तो इन चीजों को करना शुरु करें।

बच्चे को बाहर खेलने से रोकना

पहले बच्चे गांव में रहते थे, तो खाली समय में बाहर मोहल्ले के बच्चों के साथ खेलते थे, साइकिल चलाते थे या दोस्तों के साथ घूमते थे। लेकिन अब ज्यादातर पैरेंट्स शहर में रहते हैं। बच्चो को बाहर जाने से रोकते हैं। घर में रहने की सलाह देते हैं, ऐसे में बच्चे बोर होते हैं और वो फोन उठा लेते हैं और मोबाइल चलाने लगते हैं।

समाधान- बच्चों को किताबें पढ़ने, चित्र बनाने, खेलकूद, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करें। बेहतर विकल्प उपलब्ध होने पर स्क्रीन का आकर्षण खुद-ब-खुद कम हो जाएगा।

बच्चों के साथ समय बिताएं

कई बच्चों का स्क्रीन में डूबना परिवार से दूरी होता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर पैरेंट्स नौकरी के चक्कर में माता-पिता के साथ नहीं रहते हैं। इस वजह से बच्चों के पास न दादा-दादी होते है। और पैरेंट्स भी नौकरी से आने के बाद थक गए वो भी मोबाइल में व्यस्त हो जाते हैं। बच्चों को समय नहीं देते। ऐसे में उनका परिवार से इमोशनल जुड़ाव नहीं हो पाता। ऐसे में बच्चे अपने बोरियत को कम करने के लिए मोबाइल चलाना, टीवी देखना चुनते हैं।

समाधान - रोजाना कुछ समय परिवार के साथ बिना फोन के बिताएं। रात का खाना साथ खाएं, शाम की सैर करें या सोने से पहले बातचीत करें। इससे बच्चों का इमोशनल जुड़ाव मजबूत होगा।

अपनी आदतों में करें सुधार

बच्चे वही सीखते हैं जो वो घर में देखते हैं। अगर माता-पिता खुद पूरे समय फोन पर लगे रहते हैं, तो बच्चों से स्क्रीन छोड़ने की उम्मीद करना व्यर्थ है।

समाधान- खाने के समय, परिवार की बातचीत और साथ बिताए समय में फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें। जब बच्चे आपको ऐसा करते देखेंगे, तो वे स्वाभाविक रूप से सीखेंगे।

बच्चे हो रहें चिड़चिड़े

नींद की कमी बच्चों को चिड़चिड़ा और थका हुआ बना देती है। ऐसे में स्क्रीन उनके लिए आसान मनोरंजन बन जाती है। सोने से पहले स्क्रीन देखना नींद को और खराब कर देता है। इसके साथ जब आप बच्चे की बात नहीं सुनते। उनको समय नहीं देते और काम से आने के बाद बस बच्चे को डांटते हैं। इससे बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है। और डिजिटल दुनिया को अपनी दुनिया बना लेता है।

समाधान- बच्चे को प्यार से समझाएं। ध्यान दे कि- बच्चा पर्याप्त नींद ले रहा है। सोने से कम से कम 1 घंटा पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें।

बच्चों के तनाव को समझने की कोशिश करें

हर बच्चा जो घंटों स्क्रीन पर समय बिताता है, वह स्क्रीन का आदी नहीं होता। कई बार पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता, दोस्तों से तुलना या इमोशनल सपोर्ट न मिलना उन्हें डिजिटल दुनिया की ओर धकेलती है।

समाधान- बच्चों से खुलकर बात करें। उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका दें। जब घर में उन्हें समझ और सहयोग मिलेगा, तो वे स्क्रीन पर कम निर्भर रहेंगे।


 

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