हल षष्ठी 2023

2 सितंबर को मनाया जाएगा कमरछठ, संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी व्रत

2 सितंबर को मनाए जाने वाले हल षष्ठी पर्व में माताएं अपनी संतानों के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए व्रत और पूजन करती हैं।

By : दिव्या मिस्त्री
2 सितंबर को मनाया जाएगा कमरछठ, संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी व्रत

हर साल कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 2 सितंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में हल छठ, हरछठ और ललही छठ के नाम से जाना जाता है, जबकि छत्तीसगढ़ में इसकी खास पहचान कमरछठ या खमर छठ के रूप में है।

संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत

कमरछठ के दिन माताएं अपनी संतान के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। षष्ठी माता की पूजा कर परिवार की खुशहाली और बच्चों की समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी श्रद्धा के साथ यह व्रत करती हैं।

भगवान बलराम से जुड़ा है पर्व

हल षष्ठी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम से माना जाता है। बलराम जी का प्रमुख अस्त्र हल था और मान्यता के अनुसार उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हुआ था। इसी वजह से इस दिन को हलषष्ठी कहा जाता है। बलराम को हलधर, हलायुध और संकर्षण जैसे नामों से भी जाना जाता है।

बिना जोते अन्न का किया जाता है सेवन

छत्तीसगढ़ में कमरछठ की सबसे खास परंपरा इसके पारंपरिक भोजन से जुड़ी है। इस दिन महिलाएं बिना हल से जोती गई भूमि के उत्पादों का सेवन करती हैं। पूजा के बाद पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियां खाई जाती हैं। इसके अलावा भैंस के दूध, दही और घी का सेवन करने की परंपरा है।

सगरी बनाकर होती है पूजा

कमरछठ पर घर या मोहल्ले में सगरी यानी छोटे तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है। व्रती महिलाएं इसमें दूध और दही अर्पित करती हैं। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से पूजा करने की परंपरा भी निभाई जाती है।

बच्चों की पीठ पर लगती है पीली पोती

पूजा के बाद कई क्षेत्रों में माताएं बच्चों की पीठ पर पीली पोती लगाती हैं। इसके जरिए बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और नजर दोष से रक्षा की कामना की जाती है। यह परंपरा कमरछठ की विशेष पहचान मानी जाती है।

छह अंक का विशेष महत्व

कमरछठ में छह अंक का विशेष महत्व है। सगरी में छह-छह बार पानी डाला जाता है और छह खिलौने, छह लाई के दोने तथा छह चुकिया चढ़ाई जाती हैं। छह प्रकार के कपड़ों को सगरी के पानी में डुबोकर संतान की कमर पर छह बार थपकी देने की परंपरा को पोती मारना कहा जाता है।

संबंधित सामग्री

पूर्वोत्तर के युवाओं से बोले CM धामी- ‘उत्तराखंड आपका अपना घर’, एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संकल्प हो रहा साकार

पूर्वोत्तर के युवाओं से बोले CM धामी- ‘उत्तराखंड आपका अपना घर’, एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संकल्प हो रहा साकार

उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने NeST Fest-2026 कार्यक्रम में शिरकत की, पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति और एकता की प्रशंसा की।

शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 100 अंक फिसला; निफ्टी 23,850 के करीब

शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 100 अंक फिसला; निफ्टी 23,850 के करीब

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 100 अंक गिरकर 76,400 पर और निफ्टी 50 अंक गिरकर 23,850 पर बंद हुआ।

छिंदवाड़ा में सड़क की बदहाली ने खोली विकास के दावों की पोल, डोली में अस्पताल पहुंची नवविवाहिता

छिंदवाड़ा में सड़क की बदहाली ने खोली विकास के दावों की पोल, डोली में अस्पताल पहुंची नवविवाहिता

मध्य प्रदेश के पील्हावाड़ी गांव में बुनियादी स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।

पाकिस्तान को रौंदने के बाद हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान, पड़ोसियों को लगेगी मिर्ची!

पाकिस्तान को रौंदने के बाद हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान, पड़ोसियों को लगेगी मिर्ची!

एशिया कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को 55 रन पर ऑलआउट कर 7 विकेट से जीत हासिल की। हरमनप्रीत कौर ने अपना 150वां टी20 मैच खेला।

दलीप ट्रॉफी फाइनल में वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा ये 21 साल का झारखंडी बल्लेबाज, डेब्यू में ठोके 85 रन

दलीप ट्रॉफी फाइनल में वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा ये 21 साल का झारखंडी बल्लेबाज, डेब्यू में ठोके 85 रन

दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में शिखर मोहन और वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से खास पहचान बनाई, ईस्ट जोन को मजबूती प्रदान की।

Advertisement

MP ADD मिलिए विराट बुंदेला से 02 ON 7 Sep 2026