Parent-Child Conflict

Parent-Child Relationship: गलती पर डांटना जरूरी, लेकिन डांटने के बाद भूलकर न करें ये गलतियां

Conflicts between parents and children are natural and can sometimes lead to negative emotional impacts. It's crucial to mend the relationship after such incidents to maintain trust and love.

By : हेमा गुप्ता
Parent-Child Relationship: गलती पर डांटना जरूरी, लेकिन डांटने के बाद भूलकर न करें ये गलतियां

गलती पर डांटना जरूरी, लेकिन डांटने के बाद भूलकर न करें ये गलतियां

Parent-Child Relationship: बच्चों और माता-पिता के रिश्ते में कभी-कभी तकरार होना स्वाभाविक है। अनुशासन सिखाने या गलती सुधारने के लिए डांटना भी कई बार जरूरी हो जाता है। इससे बच्चे सही-गलत का फर्क समझते हैं,  इससे सीमाओं का सम्मान करना भी आता है। लेकिन डांट या बहस के बाद कई बार बच्चों के मन पर निगेटिव असर पड़ जाता है। 

उनके अंदर डर, शर्म, उलझन या अकेलेपन की भावना घर कर सकती है। इसलिए अनुशासन सिखाने जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है डांटने के बाद रिश्ते को फिर से मजबूत करना। बच्चे को यह एहसास होना चाहिए कि गुस्सा और बहस थोड़े समय के लिए होता है, लेकिन माता-पिता का प्यार और भरोसा हमेशा बना रहता है।

डांट या बहस के बाद क्या न करें?

सबसे बड़ी गलती जो पेरेंट्स करते हैं, वह है डांटने के बाद बच्चों से दूरी बनाना। कई माता-पिता सोचते हैं कि कुछ देर चुप रहने से माहौल शांत हो जाएगा। लेकिन बच्चे इस चुप्पी को अपनी अस्वीकृति या नाराजगी के मान लेते हैं। ऐसे में उनके पास जाकर बैठना, सिर पर हाथ फेरना या सामान्य बातचीत शुरू करना बेहद जरूरी है। इससे उन्हें लगता है कि रिश्ता अभी भी सुरक्षित है।

बच्चों के इमोशन समझना जरुरी

लंबा-चौड़ा लेक्चर देने की बजाय बच्चों की भावनाओं को समझना ज्यादा जरूरी होता है। बच्चे उस वक्त तर्क नहीं, बल्कि इमोशनल सपोर्ट चाहते हैं। अगर माता-पिता शांत स्वर में कहें कि “मुझे तुम्हारी तकलीफ समझ आ रही है”, तो बच्चा जल्दी सामान्य हो जाता है।

इमोशनल बच्चों का खास ध्यान रखें

कुछ बच्चे स्वभाव से ज्यादा संवेदनशील होते हैं। डांट खाने के बाद वे अंदर से बहुत ज्यादा भरे हुए महसूस करते हैं। ऐसे समय में उन्हें सलाह या उपदेश नहीं, बल्कि यह भरोसा चाहिए कि उनकी भावनाएं गलत नहीं हैं। उनकी गलती को सही न ठहराएं, लेकिन यह जरूर बताएं कि गुस्सा, दुख या डर महसूस करना पूरी तरह सामान्य है।

आवाज और भाषा का ध्यान रखें

डांटने के बाद माता-पिता की आवाज नरम और शांत होनी चाहिए। तेज या कठोर स्वर बच्चे के मन में डर और शर्म को और बढ़ा देता है। नरम शब्दों और प्यार भरी भाषा से बच्चे को यह संकेत मिलता है कि अब सब ठीक है और वे सुरक्षित हैं।

हर बहस का अंत प्यार से करें

बहस या डांट का अंत हमेशा प्यार और अपनापन से होना चाहिए। एक गले लगाना, मुस्कान या प्यार भरी कुछ बातें बच्चे के मन से नकारात्मक भावनाओं को दूर कर देती हैं। अगर रिश्ता चुप्पी या तनाव के साथ खत्म होता है, तो बच्चा उस बोझ को लंबे समय तक अपने अंदर रखता है।

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