कुछ मिनट के लक्षण भी हो सकते हैं बड़े स्ट्रोक की चेतावनी, मिनी स्ट्रोक को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

मिनी स्ट्रोक के लक्षण और उपचार

कुछ मिनट के लक्षण भी हो सकते हैं बड़े स्ट्रोक की चेतावनी, मिनी स्ट्रोक को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) या मिनी स्ट्रोक के लक्षण जैसे चेहरे का टेढ़ा होना, दृष्टि में धुंधलापन, और अचानक कमजोरी, गंभीर स्ट्रोक के लिए प्रारंभिक चेतावनी हो सकते हैं।

कुछ मिनट के लक्षण भी हो सकते हैं बड़े स्ट्रोक की चेतावनी मिनी स्ट्रोक को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

कुछ मिनटों के लिए बोलने में दिक्कत, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं सामान्य नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये मिनी स्ट्रोक, यानी ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) के संकेत हो सकते हैं। हालांकि इसके लक्षण कुछ मिनटों या एक घंटे के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन इसे हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यह भविष्य में होने वाले बड़े स्ट्रोक की गंभीर चेतावनी माना जाता है।

गंभीर स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ सकता है

न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक TIA तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में कुछ समय के लिए रक्त प्रवाह कम हो जाता है। इससे दिमाग को अस्थायी रूप से ऑक्सीजन की कमी होती है और कुछ समय के लिए न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर आने वाले दिनों या महीनों में गंभीर स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।

क हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन

मिनी स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में चेहरे का टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या दूसरों की बात समझने में कठिनाई, एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देना, अचानक चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना और बिना कारण तेज सिरदर्द शामिल हैं। यदि ये लक्षण कुछ मिनटों में ठीक भी हो जाएं, तब भी तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, हृदय रोग, अनियमित धड़कन, 55 वर्ष से अधिक उम्र और पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है।

स्ट्रोक के इलाज में गोल्डन आवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर अस्पताल पहुंचने से दिमाग को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर MRI, CT स्कैन, कैरोटिड डॉप्लर, ECG, इकोकार्डियोग्राफी और रक्त जांच कर कारण का पता लगाते हैं। बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन करना बेहद जरूरी है।

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