हाइपरकेलेमिया का खतरा...
सेंधा नमक में आयोडीन की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। इसके लंबे समय तक सेवन से शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपरकेलेमिया कहा जाता है। हाइपरकेलेमिया एक गंभीर स्थिति है जिसमें रक्त में पोटैशियम का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है।
यह स्थिति हृदय, मांसपेशियों और नसों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यदि पोटैशियम का स्तर 5 तक पहुँच जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए, जो लोग पहले से किसी हृदय या किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए सेंधा नमक बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
आयोडीन की कमी से घेंघा रोग का खतरा....
सेंधा नमक में आयोडीन की मात्रा कम होने के कारण इसका लगातार सेवन घेंघा रोग (Goiter) जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। आयोडीन की कमी शरीर में थायरॉयड ग्रंथि को प्रभावित करती है और कई बार मोटापे, थकान और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए डॉ. सिराज सिद्दीकी का सुझाव है कि सेंधा नमक का सेवन केवल सफेद नमक के साथ मिलाकर ही किया जाए। सफेद नमक में आयोडीन की सही मात्रा पाई जाती है और इसे सरकार की ओर से आयोडाइज किया जाता है।सेंधा नमक और सफेद नमक क्या है फर्क?
देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार, सेंधा नमक और सफेद नमक का स्वाद लगभग एक जैसा लगता है, लेकिन इनकी तासीर और पोषण तत्व अलग होते हैं।सफेद नमक
1. आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होती है। 2. पोटैशियम की मात्रा कम होती है। 3. हृदय और थायरॉयड के लिए सुरक्षित।
सेंधा नमक
1. आयोडीन की मात्रा बहुत कम होती है 2. पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है 3. लंबे समय तक सेवन करने पर हाइपरकेलेमिया का खतरा इसलिए डॉ. सिद्दीकी का सुझाव है कि सेंधा नमक का सेवन केवल सफेद नमक के साथ मिलाकर करना चाहिए ताकि शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहे।हाइपरकेलेमिया के लक्षण...
हाइपरकेलेमिया की शुरुआती स्थिति में कई लोग इसे पहचान नहीं पाते। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: 1. थकान और कमजोरी। 2. दिल की धड़कन अनियमित होना। 3. मांसपेशियों में कमजोरी या अकड़न। 4. कभी-कभी चक्कर आना या सांस लेने में दिक्कत। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो हाइपरकेलेमिया गंभीर रूप ले सकता है और किडनी या हृदय फेल होने का खतरा बढ़ सकता है।