Himachal news: हिमाचल प्रदेश में छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों की गरिमा को बनाए रखने के लिए सुक्खू सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। यौन उत्पीड़न के मामलों में दोषी पाए गए तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने राज्य में स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
जांच के बाद हुई कड़ी कार्रवाई

पिछले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न कॉलेजों से यौन उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने बहुस्तरीय जांच करवाई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद सरकार ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें नौकरी से हटा दिया।
इन शिक्षकों पर गिरी गाज
सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को बर्खास्त किया गया है—
- डॉ. अनिल कुमार, सिद्धार्थ राजकीय महाविद्यालय, नादौन (केमिस्ट्री)
- पवन, जवाहर लाल नेहरू गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, शिमला
- डॉ. वीरेंद्र शर्मा, राजकीय महाविद्यालय, तीसा (गणित)
भविष्य में सरकारी नौकरी पर भी लगी रोक
शिक्षा विभाग की कार्रवाई केवल बर्खास्तगी तक सीमित नहीं है। नियमों के तहत इन तीनों शिक्षकों को भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

छात्राओं की सुरक्षा पर फोकस
राज्य सरकार की इस कार्रवाई को छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल शिक्षा संस्थानों में अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि अभिभावकों और छात्रों के बीच भरोसा भी बढ़ेगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी की इस तरह के मामलों में संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी बिना किसी रियायत के कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
