14 की उम्र में निभाया था रेप पीड़ित का किरदार...
सिर्फ 14 साल की उम्र में तब्बू ने देव आनंद की फिल्म ‘हम नौजवान’ में रेप पीड़ित प्रिया का किरदार निभाया था। इतनी कम उम्र में इतना चुनौतीपूर्ण रोल निभाना हर किसी के बस की बात नहीं थी। इससे पहले तब्बू फिल्म ‘बाजार’ में बतौर बाल कलाकार नजर आ चुकी थीं।उनकी असली पहचान ‘विजयपथ’ (1994) से बनी, जिसमें उन्होंने अजय देवगन के साथ काम किया। फिल्म सुपरहिट हुई और तब्बू को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री पुरस्कार मिला।View this post on Instagram
पद्मश्री सम्मानित तब्बू : अभिनय की शक्ति...
‘माचिस’, ‘चांदनी बार’, ‘हैदर’ और ‘अंधाधुन’ जैसी फिल्मों में तब्बू ने अपने अभिनय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। हर फिल्म में उन्होंने अलग-अलग किरदारों को गहराई से जिया — कभी भावनाओं से भरी नायिका, तो कभी समाज की कठोर सच्चाइयों को दिखाती महिला।“मेरे लिए मां ही पूरी दुनिया हैं।” -तब्बू
बचपन में ही उनके माता-पिता अलग हो गए थे, जिसके बाद वो अपने मां के सात ही रहीं। तब्बू ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो अपने पिता का चेहरा तक नहीं देखना चाहतीं — “मेरे लिए मां ही पूरी दुनिया हैं।” मां रिजवाना ने बेटियों फराह और तब्बू दोनों को अकेले पाला और उनकी पढ़ाई-लिखाई मुंबई में करवाई।1987 में बॉलीवुड में किया डेब्यू ...
1987 में बोनी कपूर ने तब्बू को फिल्म ‘प्रेम’ में साइन किया था, लेकिन यह फिल्म 8 साल बाद 1995 में रिलीज हुई। इस दौरान तब्बू कई अन्य फिल्मों में नजर आईं, लेकिन पॉपुलैरिटी ‘विजयपथ’ से ही मिली।नागार्जुन से जुड़ा नाम, लेकिन रिश्ता अधूरा रह गया....
तब्बू की निजी जिंदगी भी हमेशा सुर्खियों में रही। उनका नाम कई लोगों से जुड़ा, लेकिन नागार्जुन के साथ उनका रिश्ता सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी, लेकिन नागार्जुन शादीशुदा थे। तब्बू ने इस रिश्ते को सम्मानपूर्वक खत्म कर दिया। नागार्जुन ने 2017 में कहा था – “तब्बू मेरी बहुत पुरानी और प्यारी दोस्त हैं।”
शादी को लेकर जवाब में हमेशा रहीं बेबाक...
जब भी उनसे शादी को लेकर सवाल पूछा जाता है, तब्बू अपने चिर-परिचित अंदाज में कहती हैं – “लोग मुझसे और सलमान खान से शादी के सवाल पूछना बंद करें।”
काला हिरण मामले में बेवजह फसी तब्बू...
1998 में फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान तब्बू पर भी काले हिरण के अवैध शिकार का आरोप लगा था। हालांकि बाद में उन्हें अदालत ने बरी कर दिया।तब्बू ने कहा था –
“इस पूरे मामले में मुझे बेवजह घसीटा गया था।”आज भी सादगी और संवेदना की मिसाल...
पद्मश्री सम्मानित तब्बू आज भी सिनेमा में अपने सशक्त अभिनय, सादगी और गहरी सोच के लिए जानी जाती हैं। उनकी हर भूमिका में संवेदना, गहराई और भारतीय नारी की आत्मा झलकती है।View this post on Instagram
तब्बू की प्रोफेशनल लाइफ...
तब्बू की फिल्मी यात्रा बेहद समृद्ध और विविध रही है। उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित किया कि सिनेमा सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि गहराई और संवेदना का माध्यम भी हो सकता है।
उनके हिस्से में ‘चांदनी बार’, ‘विरासत’, ‘दे दे प्यार दे’, ‘हम साथ-साथ हैं’, और ‘दृश्यम’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। हर फिल्म में तब्बू का किरदार बिल्कुल अलग था — कभी समाज की सच्चाई दिखाने वाली ताकतवर महिला, तो कभी भावनाओं से भरी नायिका।
तब्बू को अपने शानदार अभिनय के लिए दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Award) से सम्मानित किया जा चुका है, जो उनके सिनेमा के प्रति समर्पण और प्रतिभा को दर्शाता है।
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खुद की पहचान बनाई, पिता का नाम नहीं अपनाया...
फिल्मों में आने के बाद तब्बू ने कभी अपने माता-पिता के नाम या पिता का सरनेम इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने हमेशा अपनी पहचान खुद के दम पर बनाई। उनकी बड़ी बहन फराह नाज भी फिल्मों में सक्रिय रहीं, जबकि मशहूर अभिनेत्री शबाना आज़मी उनकी बुआ हैं। तब्बू ने अपने परिवार की जड़ों से प्रेरणा तो ली, लेकिन अपनी पहचान खुद गढ़ी — एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में, जो हर किरदार को सच्चाई से जीती है और सिनेमा की दुनिया में अपने अभिनय से अमिट छाप छोड़ती है।