बॉलीवुड के सबसे चहेते और चर्चित सितारों में शुमार अभिनेता संजय दत्त आज, 29 जुलाई को अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। फिल्मी पर्दे पर अपनी दमदार एक्टिंग, अलग अंदाज और शानदार व्यक्तित्व से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले संजू बाबा की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही।
संजय दत्त ने अपनी जिंदगी में सफलता की ऊंचाइयों को छुआ तो वहीं उन्हें कई ऐसे मुश्किल दौर से भी गुजरना पड़ा, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। मां को खोने का दर्द, निजी जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव, नशे की लत और जेल की सलाखों तक का सफर—संजय दत्त की जिंदगी में ऐसा बहुत कुछ रहा, जिसे भूल पाना आसान नहीं है।
आम तौर पर लोगों को लगता है कि फिल्मी सितारों की जिंदगी सुख-सुविधाओं और ऐशो-आराम से भरी होती है। खासकर स्टार किड्स के लिए कहा जाता है कि वे ‘चांदी की चम्मच’ लेकर पैदा होते हैं। लेकिन संजय दत्त की कहानी इस धारणा से बिल्कुल अलग रही।
सुनील दत्त और नरगिस के घर हुआ जन्म

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में अभिनेता सुनील दत्त और दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त के घर हुआ था। वह बचपन से ही फिल्मी माहौल में पले-बढ़े।
दिलचस्प बात यह है कि संजय के जन्म से पहले उनके माता-पिता ने एक मैगजीन के जरिए प्रशंसकों से अपने होने वाले बेटे के नाम के सुझाव मांगे थे। देशभर से कई नाम आए और आखिरकार उनके लिए ‘संजय’ नाम चुना गया।
एक तरफ पिता बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता थे और मां हिंदी सिनेमा की दिग्गज अदाकारा, लेकिन संजय की जिंदगी आगे चलकर कई मुश्किल मोड़ों से गुजरी।
12 साल की उम्र में कैमरे के सामने आए संजय

संजय दत्त ने बेहद कम उम्र में ही फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया था। साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में उन्होंने बाल कलाकार के तौर पर काम किया।
इस फिल्म में संजय एक छोटे से किरदार में नजर आए थे। यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। हालांकि, बतौर मुख्य अभिनेता उनका असली सफर बाद में शुरू हुआ और उन्होंने देखते ही देखते बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली।
खेल-खेल में चला दी थी पिता की बंदूक

संजय दत्त के बचपन से जुड़े कई किस्से आज भी चर्चा में रहते हैं। इनमें से एक घटना उनके परिवार के लिए बेहद डरावनी थी।
बताया जाता है कि बचपन में खेलते समय संजय दत्त के हाथ उनके पिता सुनील दत्त की लाइसेंसी बंदूक लग गई थी। खेल-खेल में उनसे गोली चल गई, जिससे घर में काम करने वाली एक महिला घायल हो गई।
इसके बाद परिवार ने महिला के इलाज की जिम्मेदारी उठाई और मामला वहीं खत्म हो गया। इस घटना ने कम उम्र में ही संजय और उनके परिवार को एक बड़ा सबक दिया।
घर की पार्टियों से लगी सिगरेट की लत

संजय दत्त का बचपन बॉलीवुड के बड़े सितारों के बीच बीता। उनके घर पर अक्सर पार्टियां और फिल्मी हस्तियों का आना-जाना लगा रहता था।
संजय इन पार्टियों में बड़े लोगों को सिगरेट पीते देखते थे। धीरे-धीरे उन्होंने भी छिपकर सिगरेट पीना शुरू कर दिया। शुरुआत में वह पार्टी के बाद बची सिगरेट की बड्स से धूम्रपान करते थे।
जब पिता सुनील दत्त को बेटे की इस आदत के बारे में पता चला तो उन्होंने संजय को डांटा और सजा भी दी। लेकिन इसका संजय पर लंबे समय तक असर नहीं रहा।
यही छोटी-सी आदत आगे चलकर उनकी जिंदगी में एक बड़ी समस्या का रूप लेने वाली थी।
मां नरगिस को खोने का सदमा

संजय दत्त की जिंदगी का सबसे बड़ा भावनात्मक झटका तब आया, जब उन्होंने अपनी मां नरगिस दत्त को खो दिया।
नरगिस दत्त लंबे समय तक कैंसर से जूझती रहीं। संजय अपनी मां के बेहद करीब थे। उनकी बीमारी और फिर मौत ने संजय को अंदर तक तोड़ दिया।
मां की मौत के कुछ ही समय बाद संजय दत्त ने फिल्मों में कदम रखा। निजी जिंदगी के इस गहरे सदमे के बीच करियर शुरू करना उनके लिए आसान नहीं था।
फिल्मी करियर में मिली जबरदस्त सफलता

संजय दत्त ने 1981 में फिल्म ‘रॉकी’ से बतौर लीड अभिनेता बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म सफल रही और संजय रातोंरात स्टार बन गए।
इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। एक्शन से लेकर रोमांस और कॉमेडी तक, संजय ने अपनी एक्टिंग की रेंज दिखाई।
‘नाम’, ‘साजन’, ‘खलनायक’, ‘वास्तव’, ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ और ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे यादगार अभिनेताओं में शामिल कर दिया।
खास तौर पर ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ में मुन्ना भाई के किरदार ने संजय दत्त को दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह दिलाई।
नशे की लत ने बदल दी जिंदगी
संजय दत्त की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया, जब वह नशे की गिरफ्त में चले गए। उन्होंने खुद कई मौकों पर अपनी नशे की समस्या के बारे में खुलकर बात की है।
नशे की लत ने उनके करियर और निजी जिंदगी दोनों को प्रभावित किया। हालांकि, परिवार और करीबियों की मदद से उन्होंने इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने की कोशिश की और बाद में अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाया।
जेल की सलाखों तक पहुंची जिंदगी

संजय दत्त की जिंदगी का सबसे विवादित अध्याय 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद सामने आया। हथियार रखने के मामले में उनका नाम सामने आया और लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली।
संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया और उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ी। जेल का दौर उनके लिए बेहद मुश्किल था, लेकिन बाहर आने के बाद उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी की।
उनकी जिंदगी के इस पूरे दौर को बाद में फिल्म ‘संजू’ में भी दिखाया गया, जिसमें रणबीर कपूर ने संजय दत्त का किरदार निभाया।
विवादों के बाद भी नहीं रुका संजू बाबा का सफर
संजय दत्त की जिंदगी में विवादों की कमी नहीं रही, लेकिन हर मुश्किल के बाद उन्होंने वापसी की।
उन्होंने साबित किया कि जिंदगी में गिरना अंत नहीं होता। असली मायने यह रखते हैं कि इंसान मुश्किल दौर से निकलकर खुद को दोबारा कैसे खड़ा करता है।
आज संजय दत्त बॉलीवुड में एक ऐसे अभिनेता के तौर पर पहचाने जाते हैं, जिनकी जिंदगी में शोहरत, विवाद, दर्द, संघर्ष और वापसी—सब कुछ देखने को मिला।
67वें जन्मदिन पर संजू बाबा को बधाई
67 साल की उम्र में भी संजय दत्त का स्टारडम बरकरार है। उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच खुद को संभालने और बार-बार नई शुरुआत करने की कहानी भी है।
संजय दत्त का सफर यही बताता है कि जिंदगी कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, वापसी का रास्ता हमेशा खुला रहता है।
Happy Birthday Sanju Baba! 🎂❤️