पंकज त्रिपाठी की उल्लेखनीय यात्रा

पंकज त्रिपाठी 7 दिन जेल में रहे थे, होटल में करते थे काम; मनोज बाजपेयी की चप्पल को बना लिया था यादगार

पंकज त्रिपाठी, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के हिंदी सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाई, उनकी जीवनी और संघर्ष की कहानी।

By : सोनिया रायकवार
पंकज त्रिपाठी 7 दिन जेल में रहे थे, होटल में करते थे काम; मनोज बाजपेयी की चप्पल को बना लिया था यादगार

 

हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में पंकज त्रिपाठी का नाम शुमार है, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी अलग पहचान बनाई। बिहार के गोपालगंज के बेलसंड गांव से निकलकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक का सफर तय करने वाले पंकज त्रिपाठी ने फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की और आज इंडस्ट्री के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से चर्चा में हैं, जो उनके संघर्ष, जुनून और अभिनय के प्रति समर्पण को दिखाते हैं।

होटल में करते थे काम

फिल्मों में पहचान मिलने से पहले पंकज त्रिपाठी पटना के होटल मौर्य की किचन में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। नौकरी के साथ वह थिएटर भी करते थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके पसंदीदा अभिनेता मनोज बाजपेयी होटल में ठहरे हुए हैं।पंकज ने होटल के स्टाफ से कह रखा था कि मनोज बाजपेयी के कमरे से कोई भी ऑर्डर आए तो उन्हें तुरंत बताया जाए। जब ऑर्डर आया तो उन्होंने सबसे अच्छे सेब चुनवाकर अच्छी तरह पैक करवाए और कमरे में भिजवाए। साथ ही वेटर से यह भी कहलवाया कि एक लड़का उनसे मिलना चाहता है और थिएटर करता है।इसके बाद पंकज खुद मनोज बाजपेयी से मिलने पहुंचे। उन्होंने उन्हें प्रणाम किया, पैर छुए और बताया कि वह भी थिएटर करते हैं। कुछ देर बातचीत के बाद वह वहां से लौट आए।

मनोज बाजपेयी की चप्पल रख ली थी अपने पास

इस मुलाकात का सबसे भावुक किस्सा अगले दिन सामने आया। मनोज बाजपेयी होटल से चेकआउट करके एयरपोर्ट के लिए निकल गए, लेकिन उनकी एक हवाई चप्पल कमरे में छूट गई। हाउसकीपिंग के कर्मचारी ने पंकज को बताया कि मनोज बाजपेयी अपनी चप्पल छोड़ गए हैं। पंकज ने चप्पल को हाउसकीपिंग में जमा करने के बजाय अपने पास रखने की बात कही। उन्होंने इसकी तुलना एकलव्य और गुरु की खड़ाऊं से की थी। इस किस्से को सुनाते हुए पंकज भावुक हो गए थे और उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे। यह घटना बताती है कि वह मनोज बाजपेयी को किस नजर से देखते थे और उनसे कितना प्रभावित थे।

पंकज त्रिपाठी की जन्मतिथि से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

पंकज त्रिपाठी की जन्मतिथि को लेकर भी एक दिलचस्प कहानी है। आधिकारिक दस्तावेजों और कई प्रोफाइल में उनकी जन्मतिथि 5 सितंबर 1976 दर्ज है। हालांकि, पंकज खुद बता चुके हैं कि उनका जन्म वास्तव में 28 सितंबर 1976 को हुआ था। उन्होंने बताया था कि बचपन में स्कूल में दाखिले के दौरान उनके भाई से जन्मतिथि पूछी गई थी। भाई को सही तारीख याद नहीं थी, जिसके चलते 5 सितंबर दर्ज हो गया। बाद में यही तारीख उनके आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज होती चली गई।

आंदोलन के दौरान 7 दिन जेल में रहे

पंकज त्रिपाठी की जिंदगी में ऐसा दौर भी आया, जब उन्हें करीब सात दिन जेल में बिताने पड़े। साल 1993 में कॉलेज के दिनों के दौरान वह छात्र राजनीति से जुड़े थे। मधुबनी में छात्रों पर हुई गोलीबारी के विरोध में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें राजनीतिक कैदी के तौर पर पटना की बेऊर जेल में करीब सात दिन रहना पड़ा। जेल में बिताया यह समय उनके लिए एक अलग अनुभव रहा। इसी दौरान उन्हें किताबें पढ़ने की आदत लगी और अलग-अलग लोगों के व्यवहार को करीब से समझने का मौका मिला। बाद में इन अनुभवों ने उनके अभिनय और किरदारों को समझने में भी मदद की।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने बदल दी पहचान

पंकज त्रिपाठी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत छोटे किरदारों से की। ‘रन’ और ‘ओमकारा’ जैसी फिल्मों में नजर आने के बाद 2012 में अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। फिल्म में सुल्तान कुरैशी का किरदार दर्शकों को खूब पसंद आया। इसके बाद उन्होंने ‘फुकरे’, ‘मसान’, ‘निल बट्टे सन्नाटा’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘न्यूटन’ और ‘स्त्री’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।

OTT ने बनाया घर-घर का चेहरा

फिल्मों के साथ OTT पर भी पंकज त्रिपाठी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘मिर्जापुर’ और ‘क्रिमिनल जस्टिस’ जैसी वेब सीरीज में उनके किरदारों ने उन्हें बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचाया। ‘मिमी’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार भी मिला। छोटे शहर से निकलकर होटल में काम करने और थिएटर से शुरुआत करने वाले पंकज त्रिपाठी ने अपनी मेहनत और अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा में खास मुकाम बनाया है।

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