कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जारी विवाद अब मनोरंजन जगत तक पहुंच गया है। तमिल सुपरस्टार थलापति विजय की विदाई फिल्म 'जन नायगन' की स्क्रीनिंग कर्नाटक के कई हिस्सों में रोक दी गई है। कन्नड़ समर्थक संगठनों और किसान संगठनों द्वारा कावेरी जल छोड़ने के विरोध में तेज हुए प्रदर्शनों के बीच राज्य के कई सिनेमाघरों ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए फिल्म के शो स्वेच्छा से रद्द कर दिए।
जन नायगन का पोस्टर
23 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस तमिल ब्लॉकबस्टर को कर्नाटक में बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया गया था। राज्यभर में यह फिल्म करीब 125 से 150 सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिनमें 75 से अधिक सिंगल-स्क्रीन थिएटर और लगभग 50 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन शामिल थीं।
प्रदर्शनों के बीच थिएटरों ने उठाए एहतियाती कदम
जैसे-जैसे कावेरी जल विवाद को लेकर प्रदर्शन तेज होते गए, कर्नाटक के कई जिलों के थिएटर संचालकों ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए फिल्म को अपने प्रदर्शन कार्यक्रम से हटा दिया। बेंगलुरु के प्रसिद्ध उर्वशी थिएटर में भी पुलिस की सलाह के बाद फिल्म की स्क्रीनिंग रोक दी गई।
थिएटर प्रबंधन ने फिल्म से जुड़े सभी प्रचार-प्रसार सामग्री और पोस्टर हटा दिए तथा निर्धारित शो की जगह कन्नड़ फिल्म 'करावली' का प्रदर्शन शुरू कर दिया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए थिएटर के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
वहीं, कावेरी विवाद के प्रमुख केंद्र रहे मांड्या जिले में कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं को फिल्म के प्रचार बैनर हटाते हुए भी देखा गया। नदी जल बंटवारे को लेकर बढ़ते तनाव के बीच यह घटनाक्रम कैमरे में भी कैद हुआ।
बेंगलुरु स्थित उर्वशी थिएटर
कावेरी जल छोड़ने के आदेश से बढ़ा विवाद
दरअसल, विवाद तब और गहरा गया जब तमिलनाडु ने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की सिफारिशों के अनुरूप कर्नाटक से कावेरी का पानी छोड़ने की मांग की। इसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने समिति की सिफारिश को बरकरार रखते हुए कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़े।
हालांकि, इस फैसले का कर्नाटक के किसान संगठनों और कन्नड़ समर्थक समूहों ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि राज्य पहले ही जल संकट का सामना कर रहा है और ऐसे में अतिरिक्त पानी छोड़े जाने से कृषि कार्यों के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
कावेरी नदी
तमिलनाडु ने दोहराई आदेश पालन की मांग
दूसरी ओर, तमिलनाडु के राजनीतिक नेताओं ने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि वैधानिक प्राधिकरण द्वारा लिए गए निर्णयों को बिना किसी विचलन के लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और कावेरी प्रबंधन बोर्ड द्वारा किए गए निर्णय, समझौते और आदेशों का अक्षरशः पालन होना चाहिए।