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Chhindwara Tragedy: छिंदवाड़ा का दर्दनाक कांड: जहरीली खांसी की दवा से 17 मासूमों की मौत, सरकार की लापरवाही बेनकाब

chhindwara tragedy छिंदवाड़ा का दर्दनाक कांड जहरीली खांसी की दवा से 17 मासूमों की मौत सरकार की लापरवाही बेनकाब

Chhindwara Tragedy: छिंदवाड़ा जिले में जहरीली खांसी की दवा कोल्ड्रिफ ने 17 बच्चों की जान ले ली। यह कोई आम हादसा नहीं है, बल्कि यह सरकार की भारी लापरवाही और सिस्टम की नाकामी की वजह से हुआ है। जिस सिरप को सवालों के जवाब देनी चाहिए थी, उसने ही मासूमों की जान छीन ली। [caption id="attachment_109204" align="alignnone" width="242"]Chhindwara Tragedy Chhindwara Tragedy[/caption]

दवा कैसे बनी मौत की वजह?

तमिलनाडु के कांचीपुरम की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी ने जहरीली दवा बनाई, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल नाम का एक खतरनाक केमिकल 48.6% पाया गया, जबकि इसका लिमिट सिर्फ 0.1% होना चाहिए था। यह केमिकल बच्चों की किडनी फेल कर देता है और जान ले सकता है। [caption id="attachment_109205" align="alignnone" width="80"]Chhindwara Tragedy Chhindwara Tragedy[/caption]

आखिरकार 17 मौतें होने के बाद ही सरकार जागी

सरकार ने कब उठाया कदम?पहली बच्ची की मौत 4 सितंबर को हुई, लेकिन दवा अभी तक बिना प्रतिबंध के बिकती रही। छिंदवाड़ा के डॉक्टरों ने इसे लाखों बच्चों को देते रहे जबकि सिस्टम पूरी तरह मुर्दा पड़ा था। आखिरकार 17 मौतें होने के बाद ही सरकार जागी।

जिम्मेदार कौन?

मध्य प्रदेश सरकार:

[caption id="attachment_109206" align="alignnone" width="161"]Chhindwara Tragedy Chhindwara Tragedy[/caption] यहां की खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने समय रहते कोई कारगर कार्रवाई नहीं की। ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य, डिप्टी डायरेक्टर शोभित कोस्टा और ड्रग इंस्पेक्टरों को अब जिम्मेदार मानते हुए सस्पेंड किया गया, मगर उन मौतों के पहले कार्रवाई का सवाल खड़ा रहता है।

डॉक्टर प्रवीण सोनी:

Chhindwara Tragedy: ये डॉक्टर जो बच्चों को जहरीली दवा देते रहे, गिरफ्तार हुए। लेकिन क्या सिर्फ डॉक्टर को दोष देना सही है, जब सरकार और कंपनी की पूरी टीम ने लापरवाही बरती?

श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी:

मुनाफे के चक्कर में ये कंपनी हजारों परिवारों के लिए काल बन गई। गुणवत्ता जांच की कमी साफ़ दिखती है, जबकि ये कंपनी मौजूदा नियमों की धज्जियाँ उड़ा रही थी।सरकार की नाकामी ने बढ़ाई मौतों की संख्यामध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने समय पर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। [caption id="attachment_109207" align="alignnone" width="268"]Chhindwara Tragedy Chhindwara Tragedy[/caption]

अब खुद मुख्यमंत्री आ रहे हैं’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तो यह कह कर मामले को हल्के में लेने की कोशिश की कि ‘पहले विधायक भी नहीं जाते थे, अब खुद मुख्यमंत्री आ रहे हैं’। मौतें तब हुईं जब तक बिल्कुल कार्रवाई न हो, तब तक कई परिवारों का दर्द बढ़ता रहा।जनता का सवाल14 मासूमों की जान के लिए सिर्फ 4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान हुआ है, जो कतई सम्मानजनक नहीं। इसके साथ ही परिवारों को नौकरी देने की मांग चल रही है। सवाल उठता है कि क्या पैसे से मासूमों की जान वापिस आ जाएगी? निष्कर्षयह पूरा मामला इस देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा सवाल है।

हर जगह लापरवाही की झलक

जहरीली दवा बनाने से लेकर समय रहते जांच और कार्रवाई न कराने तक, हर जगह लापरवाही की झलक मिली है। सरकार चाहे चाहे कितनी भी सफाई दे, सच यह है कि मासूम बच्चे मौत के मुंह में चले गए और जिम्मेदार खुलेआम नासमझी और अनदेखी करते रहे।

कार्रवाई की पूरी जानकारी भी दी गई

Chhindwara Tragedy: अब वक्त है कि सरकार और अधिकारी अपने कर्तव्य को समझें, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और ऐसी घटनाएं फिर कभी न हों। नहीं तो अगला कोल्ड्रिफ कहीं और फिर से किसी परिवार की खुशियां छीन लेगा।यह लेख रोज़मर्रा की भाषा में है और सीधे जिम्मेदारों, खास कर सरकार, डॉक्टर और कंपनी को जिम्मेदार ठहराता है। इसमें हाल की घटनाओं और सरकार की कार्रवाई की पूरी जानकारी भी दी गई है।

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