World’s Largest Natural Shivling: जशपुर में विराजमान हैं विश्व के सबसे बड़े प्रकृतिक शिवलिंग!

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World’s Largest Natural Shivling: जशपुर में विराजमान हैं विश्व के सबसे बड़े प्रकृतिक शिवलिंग!

world’s largest natural shivling जशपुर में विराजमान हैं विश्व के सबसे बड़े प्रकृतिक शिवलिंग

World’s Largest Natural Shivling: छत्तीसगढ़ के जशपुर में स्थित मधेश्वर पहाड़ जिसे विश्व के सबसे बड़े प्रकृतिक शिवलिंग के रुप में पूजा जाता है। यह छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर मया गांव में स्थित मधेश्वरण की आकृति शिवलिंग जैसी है, कई सालो से गांव में रहने वाले लोग मधेश्वरण पर्वत की शिवलिंग के रुप में पूजा करते हैं। Read More: Eat These Things Saturday for Blessings: शनिवार को इन चीजों का करें सेवन, मिलेगी शनिदेव कृपा! आपको बता दें कि , इस पहाड़ को लार्जेस्ट नेचुरल शिवलिंग के रुप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज किया गया है, इस माउंटेन को देखने के लिए टूरिस्ट दूर - दूर से आते हैं और प्रकृति से अपने आप को जोड़ते हैं।

पर्वत के नीचे स्थित है गुफा...

बताया जाता है कि, इस पर्वत के नीचे एक गुफा है, और उस गुफा में सैकड़ों साल पुराना एक मंदिर बना हुआ है, जिसमें भगवान शिव शिललिंग के रुप में विराजमान है, यहां लोग दूर - दूर से दर्शन करने आते है, यहां आकर शिवलिंग के दर्शन करने के बाद मन को सुकून और शांति की अनुभूति होती है।

सावन में लगती हैं लंबी कतारे...

मधेश्वर पर्वत छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि कई राज्यों में भी प्रसिद्ध है। और सावन में भारी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। पूजा - पाठ करने के साथ प्रकृतिक की भी अद्भुत अनुभूति होती है।

मनकामनाओं होती है पूर्ति...

मान्यता है कि, मधेश्वर पर्वत के नीचे स्थित गुफा मंदिर में विराजमान शिवलिंग के दर्शन करते हो और अगर आप यहां सच्चे दिल से कोई भी मन्नत मांगते हो तो वो जरुर पूरी होती है। अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित है तो इस स्थान में जरुर जाएं। कहा जाता है कि यहां आकर पूजा - अर्चना करने से बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यहां की मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से ही मानसिक और शारीरिक रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

कब हुई यहां मंदिर की स्थापना...

मधेस्वर पर्वत में साल 1924 में मधेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई थी। बताया जाता है, कि अब इस मंदिर में पुजारियों की चौथी पीढ़ी मंदिर के देख रेख , पूजा - अर्चना कर रहै हैं। लेकिन जब इस पर्वत को विश्व के सबसे बड़े प्रकृतिक शिवलिंग का दर्जा दिया गया, तब से यह देश भर में प्रशिद्ध हो गया और सावन में देश के कोने - कोने से लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।  

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