Shree Badwale Mahadev Temple Bhopal: जानिए भोपाल के इस रहस्यमयी प्राचीन मंदिर की...

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Shree Badwale Mahadev Temple Bhopal: जानिए भोपाल के इस रहस्यमयी प्राचीन मंदिर की खासियत, जिनके भक्त विदेशों में भी मौजूद...

shree badwale mahadev temple bhopal जानिए भोपाल के इस रहस्यमयी प्राचीन मंदिर की खासियत जिनके भक्त विदेशों में भी मौजूद

Shree Badwale Mahadev Temple Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कायस्थपुरा क्षेत्र में स्थित श्री बड़वाले महादेव मंदिर भोपाल का बहुत पुराना मंदिर है, यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। यहां हर रोज नियमित रुप से पूजा की जाती है। और इस मंदिर को भोपाल का सबसे पुराना मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि इसमें शिवलिंग बड़ के पेड़ में विराजमान हैं। Read More: “aaj ka rashifal in hindi:17 july 2025, मेष से मीन तक जानें अपना दिन | Daily horoscope” आपको बता दें कि, वटवृक्ष की जड़ों में शिवलिंग के प्रकट होने की वजह से उनको एक और नाम बाबा बटेश्वर मंदिर दिया गया।

सावन में लगता है भक्तों का तांता...

श्रावण के महिने में यहां भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं, और कहा जाता हैं यहां जो भी अपनी मनोकामना को सच्चे मन से नंदी बाबा के कान में कहकर मांगता है, उसकी मनोकमाना जरुर पूरी होती है। आपको बता दें कि, यहां सोमवार के दिन भक्तों की भारी भीड़ नजर आती है। और न सिर्फ भोपाल के लोग बल्कि विदेशो से भी लोग यहां आनलाइन भगवान शिव के दर्शन करते हैं।

कैसे हुए शिवलिंग प्रकट...

यहां लगभग 400 साल पहले जंगल हुआ कता था और यहां कई तरह के पौधे लगे हुए थे। और एक दिन एक साधु बड़ के वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे तभी उन्होंने जैसे करवट ली तो उनका सर जड़ में स्थित एक सिला से टकरा गया और जब वहां की मिट्टी हटाई गई तो वहां शिवलिंग दिखाई दिए, जिसके दर्शन के बाद साधु ने यह जानकारी श्रद्धालुओं और भक्तों को दी। फिर वहां खुदाई की गई तो उस पौधे से शिवलिंग प्रकट हुए और फिर उनको विधिवत रुप से उनकी स्थापना कराई गई। तब से ही उनकी हर रोज पूजा होती है।

मंदिर के संयोजक ने बताई अहम बातें...

मंदिर के संयोजक ने नेशन मिरर से बात करते हुए बताया कि- बड़वाले महादेव सिर्फ भोपाल या मध्यप्रदेश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इनके भक्त हैं। और यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। और यहां पहले जंगल था तो पहले जो साधु संत थे उन्हें लगा बड़ के पेड़ के पास कुछ है, तो जब उन्होंने देखा तो वहां शिवलिंग निकले और वहीं छोटी मढ़िया बनाकर उनकी पूजा करने लगे। उन्होंने बताया कि, जो बड़ का पौधा है, वो एक शक्ति बड़ है, और ऐसा पहला शक्ति बड़ है, जिसमें शिवलिंग स्थापित हैं। और इस पौधे में कभी जटाएं नहीं लगती हैं। और उन्होंने कहा यहां जो मांगते हैं वो पूरा होता है। इसलिए तो भक्तो का तांता लगा रहता है।

जल्द बनेगा भव्य मंदिर...

संयोजक ने बताया की मंदिर को और भव्य तरीके से बनवाया जा रहा है, वहां शिव जी के साथ रहने वाले देव और भूतो की भी कृतियां भी स्थापित करवायी जाएगी। साथ ही जब श्री राम माता सीता को लेने लंका जा रहें थे तो सेतु निर्माण किया गया था तो उस सेतु निर्माण की चित्रकारी भी कराई जाएगी।  

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