Ram Lakshman Temple Mp: ऐसा मंदिर जहां भगवान राम और लक्ष्मण की हैं मूछे!

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Ram Lakshman Temple Mp: ऐसा मंदिर जहां भगवान राम और लक्ष्मण की हैं मूछे!

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Ram Lakshman Temple Mp: मध्यप्रदेश में एक ऐसा मंदिर हैं जहां भगवान राम भाई लक्ष्मण के साथ विराजमान है। यह मंदिर विदिशा जिले में हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। एक और आनोखी बात राम और लक्ष्मण की मूछे भी नजर आती हैं। इस मंदिर में राम जी के साथ माता सीता विराजमान नहीं है। मध्यप्रदेश में बहुत कम ऐसे मंदिर है, जहां भगवान राम माता सीता के बिना विराजमान हो।

बताया जाता है कि, यहां रामायण को लिखने वाले वाल्मीकि जी ने भी निवास किया था। शास्त्रों में भी इनका उल्लेख मिलता है।

वहां मिलते है भगवान के पद चिन्ह

मान्यताओं के मुताबिक, जब रावण ने माता सीता का हरण किया था। तब भगवान राम भाई लक्ष्मण के साथ उनकी खोज करते हुए विदिशा आए थे। उन्होंने यहां बेतवा नदी के तट पर एक दिन विश्राम किया था। आज उस स्थान को ‘चरण तीर्थ’ के नाम से जाना जाता है, वहां आज भी श्रीराम के चरण चिह्न आज भी पूजे जाते हैं। वहीं वहां खुदाई के दौरान बेतवा नदी के तट पर राम-लक्ष्मण की प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थीं।

 

भगवान राम के साथ माता सीता नहीं हैं विराजमान

देश के लगभग हर मंदिर में भगवान राम के साथ माता सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएं होती हैं, लेकिन विदिशा में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान राम के साथ लक्ष्मण तो विराजमान हैं, लेकिन माता विराजमान नही है। ये मंदिर ‘वनवासी राम मंदिर’ के रुप में प्रसिद्ध है। यहां विराजमान राम- लक्ष्मण की मूछे भी हैं, इस वजह से इन्हें ‘मूंछ वाले राम-लक्ष्मण’ भी कहा जाता है।

इतिहासकार बताते हैं कि ये प्रतिमाएं भगवान राम के उस काल को दर्शाती हैं जब वे सीता जी की खोज में लक्ष्मण के साथ वन-वन भटक रहे थे।

शत्रुघ्न और विदिशा का ऐतिहासिक संबंध

शास्त्रों के मुताबिक, रावण वध के बाद जब भगवान राम ने राजपाट संभाला, तब उन्होंने अपने भाइयों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी थी। विदिशा क्षेत्र शत्रुघ्न के हिस्से आया। बाद में शत्रुघ्न ने अपने छोटे पुत्र युवकेतु को विदिशा का राजा बनाया।

इसके अलावा, महर्षि वाल्मीकि को भी विदिशा से गहरा नाता रहा है। कहा जाता है कि, बिहार के चंपारण के बाद उन्होंने विदिशा में ही निवास किया और यहीं से ज्ञान-भक्ति का प्रसार किया।

पुष्कर यात्रा और तर्पण की मान्यता

मंदिर से जुड़ी एक और प्रचलित मान्यता है कि, राज्याभिषेक के बाद जब भगवान राम अपने पिता की अंत्येष्टि से जुड़े कर्मों के लिए तीर्थ यात्रा पर निकले थे, तब वे अयोध्या से पुष्कर जा रहे थे। विदिशा उस समय दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार कहलाता था। इसी यात्रा के दौरान वे चमन ऋषि के आश्रम पहुंचे थे। संक्रांति के अवसर पर आज भी यहां मेले का आयोजन किया जाता है, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए जुटते हैं।

     

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