मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय पर फर्जी मेडिकल बिलों क

फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में 66 लाख की वसूली बाकी, फिर भी 16 ASI बने SI; PHQ के फैसले पर उठे सवाल

भोपाल स्थित मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) एक बार फिर विवादों में है। फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच PHQ ने 194 सहायक उप निरीक्षकों (ASI) को उप निरीक्षक (SI) पद पर पदोन्नत कर दिया। इनमें 16 ऐसे ASI भी शामिल हैं, जिन पर फर्जी मेडिकल बिलों के जरिए 66.43 लाख रुपये की अनियमित राशि लेने का आरोप है और जिनसे विभागीय वसूली अब तक लंबित है।

कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए

इस पदोन्नति को लेकर पुलिस विभाग में सवाल उठ रहे हैं। विभागीय नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी पर विभागीय वसूली या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो, तो सामान्यतः उसकी पदोन्नति नहीं की जाती। ऐसे में वसूली लंबित होने के बावजूद इन अधिकारियों को प्रमोशन दिए जाने पर पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

16 अब पदोन्नत अधिकारियों की सूची में शामिल

मामले का खुलासा फरवरी 2025 में हुआ था, जब PHQ की कल्याण एवं लेखा शाखा ने मेडिकल प्रतिपूर्ति बिलों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान फर्जी 'प्रोलॉन्ग सर्टिफिकेट' यानी गंभीर बीमारी के प्रमाण पत्रों के आधार पर करीब 2.87 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान कराया गया। जांच में कुल 48 पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से 16 अब पदोन्नत अधिकारियों की सूची में शामिल हैं।

जाने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया

घोटाले की जांच के दौरान पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा में पदस्थ सूबेदार नीरज अहिरवार, ASI हरिहर सोनी और हर्ष वानखेड़े को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके बावजूद जिन कर्मचारियों से 66.43 लाख रुपये की वसूली लंबित है, उन्हें प्रमोट किए जाने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तक भी पहुंच चुकी

सूत्रों के अनुसार इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तक भी पहुंच चुकी है। अब यह देखना अहम होगा कि विभाग पदोन्नति के इस फैसले की समीक्षा करता है या नहीं और लंबित वसूली व विभागीय कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।