ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार

ईरान युद्ध प्रभाव: तेल कीमतों में उछाल से वैश्विक बाज़ारों में अस्थिरता

 

मार्केट रिपोर्ट : ईरान युद्ध में तेज़ी से तेल $100 के पार पहुंचने पर सेंसेक्स, निफ्टी की तेज़ी थमी; चिप शेयरों में गिरावट से एशियाई बाज़ार हिले, सोना मज़बूत बना

वैश्विक बाज़ारों ने हाल के महीनों की सबसे अस्थिर सप्ताहों में से एक झेला, जहां ईरान संघर्ष में चिंताजनक बढ़ोतरी के चलते कच्चा तेल 2022 के बाद पहली बार संक्षिप्त रूप से $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिसने एशिया और अमेरिका में पहले से जारी एआई और सेमीकंडक्टर शेयरों की तीव्र बिकवाली को और गहरा कर दिया। भारतीय बेंचमार्क शुक्रवार को लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए, जो जनवरी की शुरुआत के बाद की सबसे बुरी गिरावट की लकीर है, हालांकि सप्ताह के अंत में तेल कीमतों में आई नरमी से कुछ राहत मिली।

भारतीय बाज़ार : तेल संकट के बीच सेंसेक्स, निफ्टी की गिरावट की लकीर बढ़ी

बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार के सत्र में 331.62 अंक या 0.43% गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 102.15 अंक (0.43%) फिसलकर 23,767.45 पर बंद हुआ और महत्वपूर्ण 23,800 के स्तर से नीचे आ गया। यह दोनों सूचकांकों के लिए लगातार पांचवां गिरावट वाला दिन रहा — जनवरी के पहले सप्ताह के बाद की उनकी सबसे बुरी गिरावट की लकीर।

साप्ताहिक आधार पर, सेंसेक्स करीब 2,092 अंक या लगभग 2.68% टूटा, जबकि निफ्टी लगभग 567 अंक या करीब 2.33% फिसला, जिससे पिछले सप्ताह की पूरी बढ़त समाप्त हो गई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से मार्जिन को लेकर चिंताओं के चलते ऑटो, मेटल और एनर्जी शेयरों में बिकवाली केंद्रित रही, जबकि आईटी और मीडिया शेयरों ने कुछ राहत दी। इटरनल, बजाज फाइनेंस और महिंद्रा एंड महिंद्रा सप्ताह भर प्रमुख पिछड़ने वालों में रहे, जबकि एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, सिप्ला और विप्रो ने इस रुझान के विपरीत बढ़त दर्ज की।

विश्लेषकों ने बताया कि निफ्टी अब 23,750-23,800 के दायरे में अहम सपोर्ट का परीक्षण कर रहा है, जो इसके 50-दिवसीय मूविंग एवरेज के साथ मेल खाता है, और उम्मीद है कि जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता, तब तक सूचकांक 23,800-24,350 के दायरे में स्थिर रहेगा। ब्रोकरेज ने आगाह किया कि 23,750 से नीचे बंद होने पर आने वाले सप्ताहों में गिरावट 23,500 तक बढ़ सकती है, जिसमें घरेलू शेयरों के लिए निकट भविष्य में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को प्रमुख जोखिम बताया गया है।

एशियाई बाज़ार : चिप शेयरों में गिरावट से कोस्पी क्षेत्रीय बिकवाली में सबसे आगे

सेमीकंडक्टर और एआई-संबंधित शेयरों में गहराती बिकवाली और तेल की बढ़ती कीमतों की दोहरी मार से एशियाई शेयर बाज़ारों को इस सप्ताह भारी नुकसान झेलना पड़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ, जो शुक्रवार को 5.7% गिरकर 6,690.62 पर आ गया, जिसमें सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स 7.6% और एसके हाइनिक्स 8.3% टूटा, क्योंकि एआई मूल्यांकन को लेकर व्यापक चिंताओं के साथ-साथ एक नियामकीय सीमा ने एसके हाइनिक्स के अमेरिका-सूचीबद्ध शेयरों में आर्बिट्राज ट्रेडिंग को रोक दिया।

जापान का निक्केई 225, टेक और एआई-संबद्ध शेयरों के दबाव में 2.7% गिरकर 64,611.15 पर आ गया, जिसमें सॉफ्टबैंक ग्रुप 7.1% लुढ़का। हांगकांग का हैंग सेंग 1% फिसलकर 24,963.23 पर, जबकि चीन का शंघाई कंपोज़िट 1.6% घटकर 3,814.20 पर रहा। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200, 0.8% गिरकर 8,772.30 पर, और ताइवान का ताइएक्स करीब 2.7% टूटा। इस व्यापक कमज़ोरी ने इस बढ़ती चिंता को दर्शाया कि ऊर्जा लागत में उछाल, पहले से नाज़ुक एआई-शेयर तेज़ी के ऊपर, कॉर्पोरेट मार्जिन और उपभोक्ता मांग दोनों पर एक साथ दबाव डाल सकता है।

अमेरिकी बाज़ार : वॉल स्ट्रीट लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद

अमेरिकी शेयर बाज़ार ने शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे सप्ताह को लगभग सपाट स्तर पर समाप्त किया, लेकिन ईरान संघर्ष, टैरिफ घटनाक्रम और लगातार जारी टेक बिकवाली के बीच निवेशकों की सतर्कता के चलते समग्र रूप से सप्ताह गिरावट के साथ समाप्त हुआ। एसएंडपी 500 मामूली 0.05% चढ़कर 7,411.98 पर बंद हुआ, नैस्डैक कंपोज़िट 0.64% फिसलकर 24,975.82 पर आ गया, जबकि डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, एप्पल में 3.5% की उछाल के दम पर 0.46% चढ़कर 51,947.25 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को एसएंडपी और डाओ में मामूली बढ़त के बावजूद, तीनों बेंचमार्क सूचकांक सप्ताह भर के आधार पर लाल निशान में रहे — एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की, जबकि डाओ के लिए यह लगातार तीसरा गिरावट वाला सप्ताह रहा। सप्ताह भर संभावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर बदलती सुर्खियों के बीच बाज़ार का मिज़ाज उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें डी-एस्केलेशन की उम्मीद पर शेयरों में तेज़ी आई और सैन्य तनाव भड़कने पर हर बार गिरावट देखी गई।

कच्चा तेल : ब्रेंट क्रूड 2022 के बाद पहली बार $100 के पार, फिर नरमी

इस सप्ताह की अस्थिरता का केंद्र तेल बाज़ार रहा। ब्रेंट क्रूड गुरुवार को उछलकर $102 प्रति बैरल तक पहुंच गया — जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है — इससे पहले कि यह लगभग $100.69 पर बंद हो, यानी उस दिन करीब 7% की तेज़ी, यह तब हुआ जब ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने कथित रूप से लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे सऊदी शिपिंग मार्गों पर व्यापक नाकेबंदी की आशंका बढ़ गई। यह हमले ईरानी ठिकानों पर जारी अमेरिकी हमलों के साथ हुए, और वाशिंगटन ने निकट भविष्य में बातचीत से इनकार कर दिया।

हालांकि, शुक्रवार तक कच्चा तेल तेज़ी से नीचे आया — ब्रेंट करीब 3-4% गिरकर $97 प्रति बैरल के आसपास, और डब्ल्यूटीआई $89-92 प्रति बैरल के करीब आ गया — यह उन रिपोर्टों के बाद हुआ कि पाकिस्तान, चीन के समर्थन से, अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है, जिससे बाज़ारों को डी-एस्केलेशन की एक झलक मिली। इस गिरावट के बावजूद, ब्रेंट सप्ताह भर के लिए करीब 10-14% ऊपर रहा, जो युद्ध शुरू होने के बाद इसकी सबसे तेज़ साप्ताहिक बढ़त में से एक है, क्योंकि कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम द्वारा काला सागर में लोडिंग निलंबित किए जाने जैसे आपूर्ति-पक्ष जोखिमों ने दबाव और बढ़ा दिया।

आज भारत में सोने और चांदी के भाव

सप्ताह की शुरुआत में तेज़ बढ़त के बाद शुक्रवार को भारत में सोने की कीमतों में मामूली नरमी आई, क्योंकि कुछ मुनाफावसूली देखी गई, हालांकि मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़ी सुरक्षित निवेश मांग के चलते यह धातु एक सप्ताह पहले के स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है। आज की स्थिति के अनुसार:

- 24 कैरेट सोना: लगभग ₹14,327-14,433 प्रति ग्राम (करीब ₹1,43,270-1,44,330 प्रति 10 ग्राम) - 22 कैरेट सोना: लगभग ₹13,220-13,230 प्रति ग्राम - 18 कैरेट सोना: लगभग ₹10,817-10,825 प्रति ग्राम - चांदी: लगभग ₹230-235 प्रति ग्राम, या करीब ₹2,30,000-2,35,000 प्रति किलोग्राम

स्थानीय करों और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतें शहर-दर-शहर भिन्न होती हैं, जिनमें चेन्नई, हैदराबाद और केरल आमतौर पर सबसे ऊंची दरों में शामिल रहते हैं। इन आंकड़ों में जीएसटी और अन्य लागू शुल्क शामिल नहीं हैं, और विशेष रूप से चांदी में इस सप्ताह दिन-प्रतिदिन तीव्र उतार-चढ़ाव देखा गया है, इसलिए प्रकाशन से पहले लाइव दर की जांच करना उचित रहेगा।

रुपया और मुद्रा बाज़ार

तेल-प्रेरित जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और एफआईआई की निरंतर निकासी के बीच इस सप्ताह रुपया दबाव में रहा, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले साल के अपने सबसे कमज़ोर स्तरों के करीब बना रहा। USD/INR आज लगभग ₹96.5-96.6 पर कारोबार कर रहा था, जबकि सप्ताह के दौरान यह ₹96.9 के करीब के उच्च स्तर को छू चुका था — इस वर्ष के इसके सबसे कमज़ोर स्तरों में से एक।

अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले रुपया लगभग निम्नलिखित स्तरों पर रहा:

- 1 अमेरिकी डॉलर (USD) ≈ ₹96.54 - 1 यूरो (EUR) ≈ ₹110.5 - 1 ब्रिटिश पाउंड (GBP) ≈ ₹130.3 - 100 जापानी येन (JPY) ≈ ₹59.6

आगे की दिशा

तेल बाज़ार के अस्थिर बने रहने और तनाव बढ़ने या घटने की किसी भी नई सुर्खी से शेयर बाज़ारों में तीव्र उतार-चढ़ाव की आशंका के बीच, निवेशकों की नज़र अमेरिका-ईरान कूटनीति में हो रहे घटनाक्रम, लाल सागर में शिपिंग व्यवधान की आगे की स्थिति, और भारत तथा अमेरिका दोनों में जारी पहली तिमाही के नतीजों की रफ्तार पर रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में स्थायी नरमी संभवतः भारतीय शेयरों और रुपये दोनों को सबसे बड़ी राहत दे सकती है, जबकि एआई-मूल्यांकन को लेकर जारी चिंताएं आने वाले सप्ताह में एशियाई और अमेरिकी टेक शेयरों को अस्थिर बनाए रख सकती हैं।

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*नोट: सोना, चांदी, मुद्रा और कच्चे तेल के इंट्राडे भाव कारोबारी सत्र के दौरान बदलते रहते हैं — उपरोक्त आंकड़े शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 तक रिपोर्ट किए गए भावों को दर्शाते हैं और प्रकाशन से पहले किसी लाइव स्रोत से सत्यापित कर लिए जाएं, विशेष रूप से समय-संवेदनशील आंकड़ों के लिए।*