मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज जब्त किए जाने के बाद तनाव और गहरा गया है। इस घटनाक्रम का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
चेतावनी के बाद जहाज पर कब्जा
अमेरिकी नौसेना ने ईरान के कंटेनर शिप M/V टॉस्का को रोककर अपने नियंत्रण में ले लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अनुसार, जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन जब वह नहीं रुका तो USS Spruance ने फायरिंग कर उसके इंजन को निष्क्रिय किया। इसके बाद मरीन कमांडो जहाज पर चढ़े और उसे अपने कब्जे में ले लिया।
ईरान का आरोप: ‘यह समुद्री डकैती, जवाब देंगे’
ईरान ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। हजरत खातम अल-अनबिया सैन्य मुख्यालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने युद्धविराम तोड़ा और ओमान की खाड़ी में व्यापारिक जहाज पर हमला किया। ईरानी मीडिया ने इसे “समुद्री डकैती” बताया और जल्द जवाब देने की चेतावनी दी है।
होर्मुज फिर बना तनाव का केंद्र
दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर संकट के केंद्र में है। ईरान ने इस रास्ते को बंद करने के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ेगा।
भारत पर असर: जहाजों पर फायरिंग, सरकार सतर्क
तनाव के बीच भारतीय जहाज भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की गई और कई जहाजों को रोका गया। भारत ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप किया है।
तेल की कीमतों में उछाल, बाजार पर दबाव
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिखने लगा है, जिससे आम उपभोक्ता और उद्योग दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
